कोटद्वार: गुरु गोविंद सिंह जी के पावन प्रकाशोत्सव के अवसर पर कोटद्वार में मानवता और सेवा की अनुपम मिसाल देखने को मिली। गोविंद नगर स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु नानक सिंह में आधारशिला रक्तदान समूह एवं परिवर्तन चैरिटेबल ब्लड सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित पांचवें रक्तदान शिविर ने “रक्तदान नहीं, जीवनदान” के संदेश को साकार किया।
इस अवसर पर आयोजित शिविर में बड़ी संख्या में युवाओं और वरिष्ठ रक्तदाताओं ने भाग लिया। शिविर न केवल रक्त संग्रह का माध्यम बना, बल्कि समाज में सेवा, संवेदना और समर्पण की प्रेरणा भी दे गया।

एक ही परिवार की तीन पीढ़ियों ने रचा सेवा का इतिहास
शिविर का सबसे भावुक और प्रेरणादायक क्षण तब देखने को मिला जब आधारशिला रक्तदान समूह के संचालक सरदार दलजीत सिंह ने 59वीं बार रक्तदान किया। उनके साथ उनकी धर्मपत्नी मंजू सिंह, पुत्र बलराज सिंह, पुत्रवधू कुसुम देवी और अनुज मनप्रीत सिंह ने एक साथ रक्तदान कर यह संदेश दिया कि सेवा केवल व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरे परिवार का संस्कार होनी चाहिए।
103वीं बार रक्तदान कर अवधेश अग्रवाल बने प्रेरणा स्रोत
वरिष्ठ रक्तदाता अवधेश अग्रवाल ने शिविर में अपना 103वां रक्तदान पूर्ण कर युवाओं के सामने समर्पण और सेवा की मिसाल पेश की। उनकी प्रेरणा से बड़ी संख्या में युवाओं ने रक्तदान के लिए पंजीकरण कराया।
121 युवाओं ने कराया पंजीकरण, 82 यूनिट रक्त संग्रह
शिविर में कुल 121 युवाओं ने पंजीकरण कराया, जिनमें से 82 रक्तदाताओं ने सफलतापूर्वक रक्तदान किया। पहली बार रक्तदान करने वाले युवाओं के चेहरे पर आत्मसंतोष और गर्व साफ झलक रहा था।
सेवाभावियों का किया गया सम्मान
परिवर्तन चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से सरदार दलजीत सिंह, मंजू सिंह, उत्कर्ष नेगी, बबलू नेगी, अजय खंतवाल एवं अवधेश अग्रवाल को समाज सेवा में योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
स्वयंसेवकों और सहयोगियों की सराहना
गुरुद्वारा कमेटी के अध्यक्ष अनिल भोला और सचिव अश्विनी भाटिया ने आधारशिला समूह के स्वयंसेवकों कविता, प्रणिता कंडवाल, शिवम नेगी, उत्कर्ष नेगी, यशिका जख्वाल, दिग्विजय सिंह, शंकर बहादुर और मधु भाटिया के समर्पण की प्रशंसा की।
परिवर्तन चैरिटेबल ब्लड सेंटर ऋषिकेश की टीम से अमनदीप सिंह रंधावा और डॉ. सूरज ने शिविर को तकनीकी रूप से सफल बनाया।
प्रमुख आंकड़े
पंजीकरण: 121
रक्त संग्रह: 82 यूनिट
विशिष्ट रक्तदाता:
सरदार दलजीत सिंह – 59वीं बार
अवधेश अग्रवाल – 103वीं बार
शिविर ने यह संदेश दिया कि
“रक्त देना सौभाग्य है और जीवन बचाना सबसे बड़ा कर्तव्य।”