सेमीकंडक्टर क्षेत्र को नई रफ्तार
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई अहम घोषणाएं कीं। बजट में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) 2.0 के शुभारंभ की घोषणा की गई है, जिसका उद्देश्य उपकरण और सामग्री निर्माण, भारतीय बौद्धिक संपदा आधारित डिजाइन तथा आपूर्ति श्रृंखला को सशक्त बनाना है।
आईएसएम 2.0 के तहत उद्योग-नेतृत्व वाले अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र विकसित किए जाएंगे, जिससे तकनीक और कुशल मानव संसाधन को बढ़ावा मिलेगा। इसके लिए वित्त वर्ष 2026-27 में 1,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सरकार के अनुसार, आईएसएम 1.0 से बनी क्षमताओं को आगे बढ़ाने के लिए यह अगला चरण होगा।
इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम का विस्तार
बजट में इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ईसीएमएस) के लिए आवंटन बढ़ाने का प्रस्ताव भी किया गया है। अप्रैल 2025 में 7,22,919 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ शुरू की गई इस योजना को अब तक लक्ष्य से दोगुने निवेश की प्रतिबद्धताएं मिल चुकी हैं। इसी गति को बनाए रखने के लिए ईसीएमएस का परिव्यय बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है।
आईटी/आईटीईएस के लिए नए सेफ हार्बर प्रावधान
आईटी क्षेत्र को कर स्थिरता और प्रतिस्पर्धी लाभ देने के उद्देश्य से बजट 2026-27 में आईटी और आईटीईएस सेवाओं के लिए नए सेफ हार्बर प्रावधान पेश किए गए हैं। सॉफ्टवेयर विकास, आईटी-सक्षम सेवाएं, नॉलेज प्रोसेस आउटसोर्सिंग और संबंधित आरएंडडी सेवाओं को एक ही श्रेणी में रखा जाएगा, जिस पर 15.5 प्रतिशत का समान सुरक्षित लाभ लागू होगा।
इसके साथ ही, आईटी सेवाओं के लिए सेफ हार्बर का लाभ उठाने की सीमा 300 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2,000 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है। यह प्रक्रिया पूरी तरह स्वचालित और नियम-आधारित होगी, जिसमें कर अधिकारी द्वारा जांच की आवश्यकता नहीं होगी। कंपनियां एक बार आवेदन करने पर अपनी इच्छा से लगातार पांच वर्षों तक इस सुविधा का लाभ ले सकेंगी।
डेटा सेंटर और सेवा क्षेत्र पर फोकस
डेटा सेंटर निवेश को बढ़ावा देने के लिए बजट में प्रस्ताव किया गया है कि भारत से डेटा सेंटर सेवाओं का उपयोग कर वैश्विक ग्राहकों को क्लाउड सेवाएं देने वाली विदेशी कंपनियों को वर्ष 2047 तक कर में छूट मिलेगी, बशर्ते वे भारतीय ग्राहकों को सेवाएं भारतीय पुनर्विक्रेता के माध्यम से दें। इसके अलावा, संबद्ध कंपनियों को लागत पर 15 प्रतिशत की सुरक्षित छूट का भी प्रावधान किया गया है।
सेवा क्षेत्र को विकसित भारत का प्रमुख चालक मानते हुए शिक्षा, रोजगार और उद्यम से जुड़े मुद्दों पर एक उच्चस्तरीय स्थायी समिति गठित करने का भी प्रस्ताव है। यह समिति एआई समेत उभरती तकनीकों के रोजगार और कौशल पर प्रभाव का आकलन कर आवश्यक सिफारिशें देगी।
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