लखनऊ/हैदराबाद | 19 फरवरी, 2026 देशभर में इबादत और बरकत का पवित्र महीना ‘रमज़ान’ शुरू हो चुका है। 19 फरवरी 2026 (गुरुवार) को साल का पहला रोज़ा रखा जाएगा। चांद दिखने के साथ ही आज रात से मस्जिदों में विशेष ‘तरावीह’ की नमाज़ भी शुरू हो गई है।
मरकजी चांद कमेटी का आधिकारिक ऐलान
लखनऊ के काजी-ए-शहर और मरकजी चांद कमेटी (फरंगी महल) के अध्यक्ष, मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने चांद के दीदार की पुष्टि की है। समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए उन्होंने कहा:
“देश के अलग-अलग हिस्सों से चांद दिखने की तस्दीक (पुष्टि) हो गई है। इसके आधार पर कल, 19 फरवरी को पहला रोजा होगा। मैं पूरे देश के मुसलमानों को इस मुकद्दस महीने की मुबारकबाद देता हूँ।”
महत्वपूर्ण अपील: मौलाना ने समुदाय से अपील की है कि सभी नमाज़ और इबादत मस्जिद परिसर के भीतर ही करें। उन्होंने सड़कों पर नमाज़ न पढ़ने और शांति व्यवस्था बनाए रखने पर ज़ोर दिया है।
तेलंगाना सरकार का बड़ा फैसला: ड्यूटी समय में कटौती
रमज़ान के दौरान रोज़ेदारों की सहूलियत के लिए तेलंगाना सरकार ने एक विशेष आदेश (मेमो नंबर 677/Poll.B/26) जारी किया है। इसके तहत:
- शाम 4:00 बजे छुट्टी: सभी मुस्लिम सरकारी कर्मचारी, शिक्षक, अनुबंध (Contract) कर्मचारी और आउटसोर्सिंग स्टाफ शाम 4 बजे कार्यालय छोड़ सकेंगे।
- उद्देश्य: यह छूट इसलिए दी गई है ताकि कर्मचारी समय पर घर पहुँचकर इफ्तार (रोज़ा खोलना) कर सकें और धार्मिक कर्तव्यों का पालन कर सकें।
- यह नियम राज्य के सभी बोर्डों, निगमों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों पर भी लागू होगा।
देशभर का माहौल और ताज़ा अपडेट्स
- बाज़ारों में रौनक: दिल्ली की जामा मस्जिद, मुंबई के मोहम्मद अली रोड और लखनऊ के अमीनाबाद जैसे ऐतिहासिक बाज़ारों में इफ्तारी, खजूर और फलों की खरीदारी के लिए भारी भीड़ देखी जा रही है।
- सुरक्षा के कड़े इंतजाम: उत्तर प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में प्रशासन ने रमज़ान के दौरान सुचारू यातायात और सुरक्षा के लिए विशेष पुलिस बल तैनात किया है।
- अवधि: खगोलीय गणना के अनुसार, इस वर्ष रमज़ान का महीना 29 या 30 दिनों का होगा। ईद-उल-फितर की सटीक तारीख मार्च के मध्य में अगले चांद के दीदार पर निर्भर करेगी।
रमज़ान का महत्व: एक नज़र में
रमज़ान इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना है, जिसे रोज़ा (उपवास), दान (ज़कात), और आत्म-चिंतन के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। श्रद्धालु भोर (सेहरी) से लेकर सूर्यास्त (इफ्तार) तक बिना अन्न-जल के रहते हैं और रात में विशेष ‘तरावीह’ की नमाज़ अदा करते हैं।
“सभी पाठकों को रमज़ान करीम की दिली मुबारकबाद!”
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