देहरादून। प्रदेश में सीधी भर्ती के रिक्त पदों का विवरण न देने पर शासन ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन के निर्देश पर कार्मिक विभाग ने सभी विभागों को तीन दिन के भीतर रिक्त पदों की जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है। चेतावनी दी गई है कि समय पर सूचना न देने और अदालत में प्रतिकूल स्थिति बनने पर संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे।
मामला न्यायालय में लंबित एक रिट याचिका से जुड़ा है, जिसमें अदालत ने राज्य सरकार से विभिन्न विभागों में रिक्त पदों का पूरा ब्योरा मांगा है। मुख्य सचिव को शपथ पत्र के साथ यह जानकारी प्रस्तुत करनी है। इस मामले की अगली सुनवाई 16 फरवरी को निर्धारित है।
बताया गया है कि 15 जनवरी को भी सभी विभागों को रिक्त पदों की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए पत्र भेजा गया था, लेकिन कई विभागों ने अब तक विवरण नहीं भेजा। इस पर नाराजगी जताते हुए अपर सचिव गिरधारी सिंह रावत ने सभी विभागाध्यक्षों और जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे तीन दिन के भीतर रिक्त पदों का अद्यतन ब्योरा ई-मेल के माध्यम से कार्मिक विभाग को भेजें।
शासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि संबंधित पदों के लिए चयन संस्थाओं — उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (यूकेपीएससी) या उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) — को पहले ही अधियाचन भेजा जा चुका है, तो उसका उल्लेख रिपोर्ट में अनिवार्य रूप से किया जाए।
यह आदेश प्रदेश के सभी प्रमुख सचिवों, सचिवों, विभागाध्यक्षों, गढ़वाल और कुमाऊं मंडलायुक्तों तथा जिलाधिकारियों को जारी किया गया है। सरकार का कहना है कि समयबद्ध जानकारी मिलने से भर्ती प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकेगा।