नई दिल्ली/सैन फ्रांसिस्को। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव ने वैश्विक जॉब मार्केट की दिशा बदलनी शुरू कर दी है। फिलहाल अमेरिका में AI की वजह से बड़े पैमाने पर नौकरियां खत्म होने की स्थिति सामने नहीं आई है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में नई भर्तियों की गति जरूर धीमी पड़ गई है। खासतौर पर सॉफ्टवेयर और टेक्नोलॉजी सेक्टर में इसका असर अधिक देखा जा रहा है।
सैन फ्रांसिस्को स्थित AI कंपनी एंथ्रोपिक की एक नई रिपोर्ट में उन पेशों की सूची जारी की गई है, जिन पर AI का जोखिम सबसे ज्यादा माना जा रहा है। यह रिपोर्ट उन भारतीय छात्रों के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत देती है, जो उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका में पढ़ाई कर रहे हैं या वहां करियर बनाने की योजना बना रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल AI के कारण व्यापक स्तर पर बेरोजगारी तो नहीं बढ़ी है, लेकिन युवा पेशेवरों की भर्ती में कमी देखी जा रही है। जिन नौकरियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, वहां नए उम्मीदवारों को अवसर अपेक्षाकृत कम मिल रहे हैं। टेक उद्योग इस बदलाव से सबसे अधिक प्रभावित माना जा रहा है, क्योंकि कई तकनीकी कार्य—खासतौर पर कोडिंग—अब AI आधारित टूल्स के माध्यम से आसानी से पूरे किए जा रहे हैं।
AI के खतरे को कैसे मापा गया?
रिपोर्ट तैयार करने वाले शोधकर्ताओं ने AI से जुड़े जोखिम का आकलन करने के लिए एक नया मापदंड तैयार किया है, जिसे ‘ऑब्जर्व्ड एक्सपोजर’ नाम दिया गया है। इस पद्धति में दो प्रमुख पहलुओं को जोड़ा गया है। पहला, यह समझना कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस किन-किन कार्यों को करने में सक्षम है। दूसरा, यह देखना कि वास्तविक कार्यस्थलों पर कर्मचारी अपने काम में AI का इस्तेमाल किस प्रकार कर रहे हैं। इस मूल्यांकन में उन कार्यों को अधिक जोखिमपूर्ण माना गया है, जहां AI केवल सहयोगी उपकरण के रूप में नहीं बल्कि मानव श्रम की जगह सीधे काम को स्वचालित तरीके से पूरा कर सकता है।किन नौकरियों पर सबसे अधिक असर?
विश्लेषण में पाया गया कि वे पेशे सबसे ज्यादा जोखिम में हैं, जिनके कार्य सैद्धांतिक रूप से AI के जरिए आसानी से किए जा सकते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो जिन कामों को कर्मचारी करते हैं, उन्हें AI टूल्स भी पूरा कर सकते हैं। इसी आधार पर शोधकर्ताओं ने ऐसी नौकरियों की सूची तैयार की है, जिन पर भविष्य में AI का दबाव बढ़ने की संभावना अधिक है।| जॉब | ‘ऑब्जर्व्ड एक्सपोजर‘ | ऑटोमेट किए जा सकने वाले काम |
| कंप्यूटर प्रोग्रामर | 74.5% | सॉफ्टवेयर प्रोग्राम लिखना, अपडेट और मेंटेन करना |
| कस्टमर सर्विस रिप्रेजेंटेटिव | 70.1% | कस्टमर (ग्राहक) को जानकारी देना, ऑर्डर लेना और शिकायतें सुलझाना |
| डेटा एंट्री कीपर्स | 67.1% | सोर्स डॉक्यूमेंट को पढ़ना और सिस्टम में डेटा डालना |
| मेडिकल रिकॉर्ड स्पेशलिस्ट | 66.7% | मरीजों के डेटा को एक जगह करना और उन्हें संभालना |
| मार्केट रिसर्च एनालिस्ट और मार्केटिंग स्पेशलिस्ट | 64.8% | रिजल्ट का पता लगाना, ग्राफिकली डेटा तैयार करना और जटिल नतीजों को आसान भाषा में लिखना |
| सेल्स रिप्रेजेंटेटिव, होलसेल एंड मैन्युफेक्चरिंग | 62.8% | प्रोडक्ट्स दिखाने के लिए कस्टर से बात करना और ऑर्डर लेना |
| फाइनेंशियल और इंवेस्टमेंट एनालिस्ट | 57.2% | बिजनेस, इंडस्ट्री और आर्थिक हालातों को देखते हुए इंवेस्टमेंट से जुड़े फैसले करना |
| सॉफ्टवेयर क्वालिटी एशोयरेंस एनालिस्ट और टेस्टर्स | 51.9% | सॉफ्टवेयर की गलतियों को ठीक करना और परफॉर्मेंस सुधारना |
| इंफोर्मेशन सिक्योरिटी एनालिस्ट | 48.6% | खतरों का पता लगाना और डेटा प्रोसेसिंग सिक्योरिटी को टेस्ट करना |
| कंप्यूटर यूजर सपोर्ट स्पेशलिस्ट | 46.8% | कंप्यूटर सॉफ्टवेयर या हार्डवेयर से जुड़ी यूजर्स की समस्याओं को सुलझाना |
छात्रों के लिए क्यों जरूरी है सतर्क रहना?
अमेरिका में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों का बड़ा हिस्सा सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस और मैनेजमेंट जैसे विषयों में पढ़ाई कर रहा है। इन विषयों से जुड़े करियर आमतौर पर टेक और फाइनेंस सेक्टर में आगे बढ़ते हैं—और यही क्षेत्र AI के प्रभाव से सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई पूरी करने के बाद यदि किसी छात्र को कंप्यूटर प्रोग्रामर की नौकरी मिलती है, तो इस पेशे पर AI का जोखिम लगभग 75 प्रतिशत तक आंका गया है। इसका अर्थ यह नहीं कि नौकरी नहीं मिलेगी, बल्कि यह कि भविष्य में उस नौकरी की स्थिरता पर सवाल खड़े हो सकते हैं। यही स्थिति कई छात्रों के लिए चिंता का कारण बन रही है। इसी तरह, MBA या मैनेजमेंट की डिग्री हासिल करने के बाद मार्केट रिसर्च एनालिस्ट, मार्केटिंग स्पेशलिस्ट, फाइनेंशियल एनालिस्ट या इनवेस्टमेंट एनालिस्ट जैसे पदों पर भी AI का प्रभाव बढ़ सकता है। ऐसे में विशेषज्ञों की सलाह है कि छात्र अपने करियर विकल्पों का चयन सोच-समझकर करें और पढ़ाई के दौरान ही यह तय कर लें कि उन्हें किस क्षेत्र में आगे बढ़ना है। विशेषज्ञों का मानना है कि छात्रों को ऐसी भूमिकाओं की ओर ध्यान देना चाहिए, जहां मानवीय निर्णय क्षमता, रचनात्मकता और जटिल समस्या समाधान की जरूरत अधिक हो, क्योंकि इन क्षेत्रों में AI का प्रभाव अपेक्षाकृत कम होने की संभावना है।Related posts:
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