जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़, CCTV के जरिए सेना की जानकारी पाकिस्तान भेजने की साजिश, 11 गिरफ्तार

जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़, CCTV के जरिए सेना की जानकारी पाकिस्तान भेजने की साजिश, 11 गिरफ्तार

गाजियाबाद, 21 मार्च 2026। ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के तहत गाजियाबाद पुलिस ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (Inter-Services Intelligence – ISI) से जुड़े एक जासूसी नेटवर्क का खुलासा किया है। इस मामले में अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि दो संदिग्ध—नौशाद अली और समीर उर्फ शूटर—अब भी फरार हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह गिरोह पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स के निर्देश पर भारतीय सेना की गतिविधियों की निगरानी करने की साजिश रच रहा था।

जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपियों ने दिल्ली (Delhi) और सोनीपत (Sonipat) रेलवे स्टेशन सहित कई संवेदनशील स्थानों पर सोलर एनर्जी (Solar Energy) से संचालित सीसीटीवी कैमरे (Closed-Circuit Television – CCTV) लगाने की योजना बनाई थी। इन कैमरों के जरिए सेना की मूवमेंट, हथियारों की जानकारी और अन्य गोपनीय सूचनाएं लाइव फीड (Live Feed) के माध्यम से पाकिस्तान भेजी जानी थी।

इस नेटवर्क का संचालन सुहैल मलिक उर्फ रोमियो, नौशाद अली और समीर द्वारा किया जा रहा था। पुलिस के मुताबिक, सुहैल मलिक को इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड माना जा रहा है, जबकि साने इरम उर्फ महक नेटवर्क के संचालन में सक्रिय रूप से शामिल थी। इसके अलावा प्रवीन, राज वाल्मीकि, शिवा वाल्मीकि और रितिक गंगवार समेत अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया है। जांच में यह भी सामने आया कि इस नेटवर्क का विस्तार उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और नेपाल तक फैला हुआ था।

पुलिस पूछताछ में पता चला कि आरोपी रेलवे स्टेशनों और अन्य सुरक्षा प्रतिष्ठानों की लाइव वीडियो, फोटो और जीपीएस लोकेशन (Global Positioning System – GPS) विदेशी हैंडलर्स को भेजते थे। इसके लिए मोबाइल फोन में एक विशेष एप्लिकेशन इंस्टॉल किया गया था, जिसका प्रशिक्षण पाकिस्तान से ऑनलाइन दिया गया था। कई आरोपियों ने दिल्ली कैंट (Delhi Cantt) और सोनीपत रेलवे स्टेशन पर गुप्त रूप से कैमरे भी लगाए थे, जिन्हें पुलिस ने बरामद कर लिया है।

इस मामले की शुरुआत 14 मार्च 2026 को हुई, जब थाना कौशांबी (Kaushambi Police Station) को भोवापुर इलाके में कुछ युवकों की संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिली। इसके आधार पर भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita – BNS) की धारा 61(2)/152 और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम (Official Secrets Act) की धारा 3/5 के तहत मामला दर्ज किया गया। शुरुआती कार्रवाई में 5 युवक और 1 महिला को हिरासत में लिया गया।

आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच में कई संदिग्ध वीडियो, फोटो और महत्वपूर्ण लोकेशन डाटा मिले। मामले की गहन जांच के लिए विशेष जांच दल (Special Investigation Team – SIT) का गठन किया गया, जिसमें सहायक पुलिस आयुक्त (Assistant Commissioner of Police – ACP) स्तर के दो अधिकारी और चार निरीक्षक (Inspector) शामिल हैं। जांच में अपराध शाखा (Crime Branch), खुफिया विभाग (Intelligence Unit), साइबर क्राइम टीम (Cyber Crime Team) और स्वाट टीम (Special Weapons and Tactics – SWAT) की भी मदद ली जा रही है।

एसआईटी (SIT) ने 20 मार्च को आगे की कार्रवाई करते हुए 9 और आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनमें 5 नाबालिग भी शामिल हैं। गिरफ्तार लोगों में गणेश, विवेक, गगन कुमार प्रजापति और दुर्गेश निषाद के नाम सामने आए हैं। जांच में खुलासा हुआ कि ये आरोपी विदेशी हैंडलर्स के निर्देश पर रेलवे और अन्य संवेदनशील स्थलों की रेकी कर उनकी जानकारी साझा करते थे।

जांच में यह भी सामने आया कि नेटवर्क भारतीय मोबाइल नंबरों के ओटीपी (One Time Password – OTP) विदेश भेजकर व्हाट्सएप (WhatsApp) और अन्य सोशल मीडिया अकाउंट संचालित करने की योजना बना रहा था। इसके लिए आरोपियों को 500 से 5000 रुपये तक भुगतान किया जाता था। सिम कार्ड (SIM Card – Subscriber Identity Module) हासिल करने के लिए स्नैचिंग, एजेंट्स से प्री-एक्टिवेटेड सिम खरीदना और अपने या परिजनों के नाम पर सिम लेना जैसे तरीके अपनाए गए।

धन के लेन-देन के लिए यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (Unified Payments Interface – UPI) का उपयोग किया गया, लेकिन सीधे बैंक खातों में पैसे नहीं लिए जाते थे। इसके बजाय जन सेवा केंद्रों या दुकानों के माध्यम से राशि ट्रांसफर कर नकद में निकाली जाती थी।

जांच एजेंसियों के अनुसार, इस नेटवर्क में तकनीकी रूप से दक्ष युवाओं को भी जोड़ा गया था, जिनमें मोबाइल मैकेनिक, सीसीटीवी ऑपरेटर और कंप्यूटर से जुड़े लोग शामिल हैं। इन्हें आर्थिक लालच और विदेश में बैठे संचालकों के निर्देशों के आधार पर नेटवर्क में शामिल किया गया।

फिलहाल पुलिस फरार आरोपियों नौशाद अली और समीर की तलाश में जुटी हुई है। जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय संबंधों और इसके पीछे की साजिश की गहराई से पड़ताल कर रही हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत संवेदनशील है।