तेहरान। ईरान की सत्ता में बड़ा बदलाव सामने आया है। देश की सर्वोच्च धार्मिक-राजनीतिक संस्था असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने दिवंगत अयातुल्लाह अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर नियुक्त करने की घोषणा की है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों में अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान की राजनीति में उत्तराधिकार को लेकर चर्चा तेज हो गई थी।
सरकारी मीडिया के अनुसार, 56 वर्षीय शिया धर्मगुरु मोजतबा खामेनेई को विशेषज्ञ परिषद की बैठक में व्यापक सहमति के बाद देश के सर्वोच्च पद के लिए चुना गया। परिषद के सदस्य अयातुल्लाह मोहसेन हैदरी ने कहा कि नए नेता के चयन में इस बात को भी अहम माना गया कि ईरान का सर्वोच्च नेता ऐसा होना चाहिए जिससे “दुश्मन नफरत करे।”
मोजतबा खामेनेई को सुप्रीम लीडर चुने जाने के बाद ईरान के कई शहरों में समर्थकों ने खुशी जताई। राजधानी तेहरान सहित विभिन्न स्थानों पर लोग सड़कों पर निकलकर जश्न मनाते नजर आए। इस बीच, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और ईरान की सशस्त्र सेनाओं के जनरल स्टाफ ने भी उनके नेतृत्व का समर्थन किया है।
हालांकि क्षेत्रीय तनाव अभी भी बना हुआ है। रिपोर्टों के मुताबिक, तेहरान में कई स्थानों पर धमाकों की आवाजें सुनी गईं, जबकि ईरान और उसके विरोधियों के बीच सैन्य टकराव की खबरें भी सामने आई हैं। दूसरी ओर, ईरानी जवाबी हमलों में सऊदी अरब के अल-खारज क्षेत्र में दो लोगों की मौत होने की सूचना मिली है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी पुष्टि की है कि ईरान के साथ चल रहे संघर्ष में अब तक आठ अमेरिकी सैनिक मारे जा चुके हैं।
कौन हैं मोजतबा खामेनेई?
मोजतबा खामेनेई, ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई और मंसूरेह खोजस्तेह बघेरज़ादेह के दूसरे पुत्र हैं। उनका जन्म 6 सितंबर 1969 को ईरान के प्रमुख शिया धार्मिक शहर मशहद में हुआ था। परिवार में उनके तीन भाई और दो बहनें हैं।
उनका बचपन उस दौर में बीता जब उनके पिता शाह के शासन के खिलाफ सक्रिय राजनीतिक आंदोलन में शामिल थे। इसी कारण अली खामेनेई को उस समय की गुप्त पुलिस ‘सावक’ द्वारा कई बार गिरफ्तार भी किया गया, जिससे परिवार को लगातार दबाव और अस्थिरता का सामना करना पड़ा।
1979 की इस्लामी क्रांति के बाद खामेनेई परिवार तेहरान आ गया। मोजतबा ने यहां के प्रतिष्ठित अलावी हाई स्कूल में पढ़ाई की और बाद में शिया धार्मिक शिक्षा के प्रमुख केंद्र क़ोम में इस्लामी अध्ययन किया। धार्मिक अध्ययन के बाद उन्हें “होज्जतोलेस्लाम” की उपाधि प्राप्त हुई, जो मध्यम स्तर के धर्मगुरुओं को दी जाती है।
सैन्य और राजनीतिक संबंध
शिक्षा पूरी करने के बाद मोजतबा खामेनेई ने ईरानी क्रांतिकारी गार्ड कोर (IRGC) में भी भागीदारी की। माना जाता है कि इसी दौरान उन्होंने सेना और सुरक्षा प्रतिष्ठान के कई प्रभावशाली अधिकारियों से करीबी संबंध बनाए, जो बाद में ईरानी सत्ता तंत्र में महत्वपूर्ण पदों तक पहुंचे।
1987-88 के दौरान उन्होंने ईरान-इराक युद्ध के अंतिम चरण में हबीब बटालियन के साथ भी सेवा की थी। समय के साथ वे औपचारिक राजनीति से दूर रहते हुए भी सत्ता के गलियारों में प्रभावशाली व्यक्ति के रूप में जाने जाने लगे।
पर्दे के पीछे की भूमिका
मोजतबा खामेनेई कभी चुनावी राजनीति में सक्रिय नहीं रहे और न ही उन्होंने कोई औपचारिक सरकारी पद संभाला है। इसके बावजूद उन्हें लंबे समय से ईरान के सत्ता ढांचे में प्रभावशाली व्यक्ति माना जाता रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वे अपने पिता के कार्यालय के संचालन और सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णयों में शामिल रहे। IRGC और खुफिया एजेंसियों के साथ उनके करीबी संबंधों को भी उनकी ताकत माना जाता है।
वे उन सुधारवादी नेताओं के आलोचक माने जाते हैं जो पश्चिमी देशों के साथ समझौते की वकालत करते रहे हैं, खासकर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर।
अंतरराष्ट्रीय विवाद और प्रतिबंध
साल 2019 में अमेरिका के वित्त मंत्रालय ने मोजतबा खामेनेई पर प्रतिबंध लगाए थे। उस समय अमेरिकी प्रशासन ने आरोप लगाया था कि उन्होंने बिना किसी आधिकारिक सरकारी पद के भी अपने पिता के प्रतिनिधि के रूप में काम किया और कई फैसलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
क्यों ऐतिहासिक माना जा रहा है यह फैसला?
मोजतबा खामेनेई की नियुक्ति को कई कारणों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ईरान की राजनीतिक व्यवस्था लंबे समय से सत्ता के वंशानुगत हस्तांतरण के विचार से दूरी बनाए रखने का दावा करती रही है। ऐसे में पिता के बाद बेटे को सर्वोच्च पद मिलने को एक असाधारण कदम माना जा रहा है।
हालांकि कुछ राजनीतिक और धार्मिक हलकों में इस फैसले की आलोचना भी हो रही है और इसे “वंशवादी व्यवस्था” की ओर इशारा करने वाला बताया जा रहा है।
विवादों से भी रहा है नाता
पिछले कुछ वर्षों में मोजतबा खामेनेई कई विवादों में भी चर्चा में रहे हैं। 2022 में पुलिस हिरासत में एक युवती की मौत के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों ने उन्हें भी निशाने पर लिया था। इसके अलावा 2024 में क़ोम में उनकी इस्लामी न्यायशास्त्र की कक्षाओं को अचानक निलंबित किए जाने से भी कई तरह की अटकलें लगी थीं।
राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी मानना है कि 2005 में महमूद अहमदीनेजाद के राष्ट्रपति बनने के पीछे मोजतबा का अप्रत्यक्ष समर्थन अहम रहा था। 2009 के विवादित चुनाव में भी उन्होंने अहमदीनेजाद का समर्थन किया था, जिसके बाद बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे।
आगे क्या संकेत देता है यह बदलाव?
मोजतबा खामेनेई का सर्वोच्च नेता बनना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि ईरान की वर्तमान सत्ता संरचना में कट्टरपंथी धड़ा अभी भी मजबूत स्थिति में है। विशेषज्ञों का मानना है कि उनके नेतृत्व में देश की नीतियों में बड़े बदलाव की संभावना कम है और अली खामेनेई की राजनीतिक विरासत आगे भी जारी रह सकती है।
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