देहरादून, 22 मार्च, 2026 | उत्तराखंड की राजनीति में लंबे समय से प्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार के बाद अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंत्रियों के बीच विभागों का औपचारिक बंटवारा कर दिया है। शासन और कानून-व्यवस्था पर अपनी पकड़ मजबूत रखते हुए मुख्यमंत्री ने सबसे महत्वपूर्ण विभाग अपने पास सुरक्षित रखे हैं, जबकि नए और पुराने सहयोगियों के बीच अन्य मंत्रालयों का प्रभावी वितरण किया गया है।
CM धामी ने अपने पास रखे ‘पावर’ विभाग
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शासन के मुख्य नियंत्रण वाले विभागों को अपने पास ही रखा है। अब तक 35 से अधिक विभाग संभाल रहे सीएम ने कार्यभार कम करते हुए समन्वय पर ध्यान केंद्रित किया है। उनके पास मुख्य रूप से ये विभाग रहेंगे:
- गृह (Home)
- सामान्य प्रशासन (General Administration)
- कार्मिक (Personnel)
- सतर्कता (Vigilance)
- नियुक्ति एवं प्रशिक्षण
- सूचना एवं जनसंपर्क
किसे मिली क्या जिम्मेदारी? (मंत्रिमंडल की नई सूची)
हाल ही में शामिल हुए 5 नए मंत्रियों सहित कैबिनेट के अन्य सदस्यों को उनकी प्रशासनिक दक्षता और क्षेत्रीय समीकरणों के आधार पर विभाग सौंपे गए हैं:
| मंत्री का नाम | प्रमुख विभाग (Portfolios) |
| मदन कौशिक | शहरी विकास, आवास, जनगणना और पुनर्गठन। |
| खजान दास | समाज कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण और पिछड़ा वर्ग कल्याण। |
| प्रदीप बत्रा | परिवहन, सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और सुशासन। |
| भरत सिंह चौधरी | ग्राम्य विकास, लघु एवं सूक्ष्म उद्यम (MSME) और खादी ग्रामोद्योग। |
| राम सिंह कैड़ा | आपदा प्रबंधन, पुनर्वास और जलागम प्रबंधन। |
रणनीतिक बंटवारा: प्रशासनिक दक्षता पर जोर
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि विभागों का यह बंटवारा 2027 के आगामी विधानसभा चुनावों और प्रशासनिक कार्यों में तेजी लाने के उद्देश्य से किया गया है।
क्षेत्रीय संतुलन: कुमाऊं और गढ़वाल दोनों मंडलों के मंत्रियों को महत्वपूर्ण विभाग देकर क्षेत्रीय असंतोष को दूर करने की कोशिश की गई है।
कार्यभार का वितरण: मुख्यमंत्री द्वारा अपने विभागों की संख्या घटाकर सहयोगियों को सौंपना इस बात का संकेत है कि सरकार अब ‘डेलिगेशन’ और ‘रिजल्ट’ पर अधिक ध्यान दे रही है।
निष्कर्ष
इस नए बंटवारे के साथ धामी सरकार ने अपनी टीम को पूर्ण रूप दे दिया है। मुख्यमंत्री का गृह और कार्मिक जैसे विभागों पर सीधा नियंत्रण यह सुनिश्चित करेगा कि राज्य की कानून-व्यवस्था और नौकरशाही पर उनकी पकड़ ढीली न हो, जबकि अन्य मंत्रियों को स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर मिलेगा।
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