भारत में चीनी CCTV कैमरों पर सख्ती: सुरक्षा जोखिमों के चलते बिक्री पर लग सकता है प्रतिबंध

भारत में चीनी CCTV कैमरों पर सख्ती: सुरक्षा जोखिमों के चलते बिक्री पर लग सकता है प्रतिबंध

Security Risk: India में Chinese CCTV Cameras पर सख्ती

नई दिल्ली, 31 मार्च 2026: देश में सीसीटीवी कैमरों (CCTV Cameras) को लेकर एक अहम फैसला सामने आया है, जो सीधे तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security) से जुड़ा है। जिन कैमरों का इस्तेमाल अब तक घरों और दफ्तरों की सुरक्षा (Security Surveillance) के लिए किया जा रहा था, वही अब संभावित खतरे (Security Threat) के रूप में देखे जा रहे हैं।

पिछले कुछ समय से CCTV सिस्टम की सुरक्षा (Cyber Security) को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। विभिन्न रिपोर्ट्स में यह सामने आया है कि भारत में बड़ी संख्या में इस्तेमाल हो रहे कैमरे कमजोर सुरक्षा मानकों (Weak Security Standards) पर आधारित हैं। खासतौर पर कम कीमत वाले चीनी कैमरे (Chinese CCTV Cameras) बिना पर्याप्त सुरक्षा फीचर्स के बाजार में उपलब्ध हैं, जो डेटा लीक (Data Leak) का बड़ा कारण बन सकते हैं।

एक रिपोर्ट के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 से Hikvision, Dahua और TP-Link जैसे प्रमुख ब्रांड्स के CCTV उपकरणों की बिक्री पर रोक (Sales Ban) लगाई जा सकती है। ये सभी कंपनियां चीन (China-based Companies) से जुड़ी हैं और लंबे समय से भारतीय बाजार में सक्रिय हैं।

सरकार अब ऐसे सभी कैमरों के उपयोग और बिक्री पर सख्ती (Regulatory Action) की तैयारी में है, जो निर्धारित मानकों (Security Compliance) पर खरे नहीं उतरते या जिनके पास जरूरी सर्टिफिकेशन (Certification) नहीं है। इस कदम के पीछे हाल में सामने आई कुछ गंभीर घटनाएं भी हैं, जिनमें दावा किया गया कि कुछ रेलवे स्टेशनों पर लगे कैमरों की लाइव फीड (Live Feed) विदेश तक पहुंच रही थी। इस खुलासे के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क (Security Alert) हो गईं।

इसके बाद सरकार ने निर्देश जारी किए कि सरकारी संस्थानों (Government Offices) में केवल प्रमाणित (Certified) और सुरक्षित CCTV सिस्टम ही लगाए जाएं। इस फैसले का सीधा असर उन उपकरणों पर पड़ेगा, जिनका सॉफ्टवेयर (Software) या सर्वर (Server Connectivity) विदेशी नियंत्रण में है।

आज के समय में अधिकांश CCTV कैमरे इंटरनेट आधारित (Internet-Connected Devices) होते हैं, जो न सिर्फ मोबाइल से बल्कि कंपनी के सर्वर से भी जुड़े रहते हैं। यदि इनका सॉफ्टवेयर सुरक्षित नहीं है, तो वीडियो डेटा (Video Data) अनधिकृत रूप से एक्सेस (Unauthorized Access) किया जा सकता है।

इसी खतरे को ध्यान में रखते हुए सरकार ने नए नियम (New Regulations) लागू करने की तैयारी की है, जिनके तहत हर CCTV डिवाइस को टेस्टिंग (Testing) और सर्टिफिकेशन प्रक्रिया (Certification Process) से गुजरना होगा। इसमें हार्डवेयर (Hardware), सॉफ्टवेयर और डेटा सुरक्षा (Data Security) की पूरी जांच शामिल होगी। बिना प्रमाणन वाले कैमरों की बिक्री पर रोक लग सकती है।

इस निर्णय का असर बाजार (Market Impact) पर भी पड़ने की संभावना है। सस्ते और कम गुणवत्ता वाले कैमरे हटने से कीमतों (Price Rise) में बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन इससे घरेलू कंपनियों (Indian Manufacturers) को अवसर मिलेगा, क्योंकि उपभोक्ता अब सुरक्षित और भरोसेमंद विकल्प (Trusted Products) तलाशेंगे।

देशभर में पहले से करोड़ों CCTV कैमरे लगे हुए हैं, जिनमें से कई का पासवर्ड (Default Password) कभी बदला नहीं गया या उनका सॉफ्टवेयर अपडेट (Software Update) नहीं किया गया। ऐसे कैमरे साइबर हमलों (Cyber Attacks) के लिए सबसे ज्यादा संवेदनशील माने जाते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नए कैमरों पर प्रतिबंध लगाना पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए मौजूदा सिस्टम का व्यापक ऑडिट (System Audit) जरूरी है, खासकर सार्वजनिक स्थानों (Public Places) पर लगे कैमरों का। हाल के अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में भी देखा गया है कि साइबर युद्ध (Cyber Warfare) के दौरान CCTV सिस्टम को निशाना बनाया जा सकता है।

सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, CCTV कैमरे युद्ध या संकट के समय ‘सॉफ्ट टारगेट’ (Soft Target) बन सकते हैं। ऐसे में जरूरी है कि न केवल नए, बल्कि पुराने सिस्टम की भी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। स्पष्ट है कि केवल कैमरा लगाना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उसकी साइबर सुरक्षा (Cyber Protection) भी उतनी ही जरूरी है, अन्यथा यही उपकरण सुरक्षा की बजाय जोखिम बन सकते हैं।