वित्त वर्ष 2025-26: 6.77 लाख करोड़ रुपये का उधार लक्ष्य
भारत सरकार ने भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के परामर्श से वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी छमाही (अक्टूबर 2025 से मार्च 2026) के लिए उधार योजना जारी कर दी है। सरकार 22 साप्ताहिक नीलामियों के माध्यम से बाजार से 6.77 लाख करोड़ रुपये जुटाएगी। इसमें 10,000 करोड़ रुपये सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड (Sovereign Green Bond – SGRB) के जरिए शामिल होंगे।
प्रतिभूतियों की अवधि और हिस्सेदारी
सरकार विभिन्न अवधि की प्रतिभूतियों के जरिए धन जुटाएगी। परिपक्वता अवधि के अनुसार हिस्सेदारी इस प्रकार होगी:
- 3-वर्षीय: 6.6%
- 5-वर्षीय: 13.3%
- 7-वर्षीय: 8.1%
- 10-वर्षीय: 28.4%
- 15-वर्षीय: 14.2%
- 30-वर्षीय: 9.2%
- 40-वर्षीय: 11.1%
- 50-वर्षीय: 9.2%
वित्त वर्ष की पहली छमाही में 30 वर्ष से अधिक अवधि की प्रतिभूतियों की हिस्सेदारी 34.6% थी, जिसे घटाकर दूसरी छमाही में 29.5% किया गया है।
उधारी कैलेंडर और राजकोषीय घाटा
आर्थिक मामलों की सचिव अनुराधा ठाकुर ने कहा कि सरकार को राजकोषीय घाटे के लक्ष्य (4.4%) को पूरा करने का विश्वास है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाजार उधारी धन जुटाने का सिर्फ एक स्रोत है और सरकार की जीएसटी प्राप्तियां भी मजबूत बनी हुई हैं।
मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने भी भरोसा जताया कि दूसरी छमाही में उधारी स्तर स्थिर रहेगा।
ट्रेजरी बिल और डब्ल्यूएमए सीमा
वित्त मंत्रालय ने बताया कि तीसरी तिमाही में ट्रेजरी बिलों के जरिए 13 सप्ताह के लिए साप्ताहिक उधारी 19,000 करोड़ रुपये होगी। इसमें:
- 91 डीटीबी: 7,000 करोड़ रुपये
- 182 डीटीबी: 6,000 करोड़ रुपये
- 364 डीटीबी: 6,000 करोड़ रुपये
साथ ही, सरकार के भुगतान और प्राप्तियों में अस्थायी असंतुलन को संतुलित करने के लिए RBI ने वेज एंड मीन एडवांस (WMA) की सीमा 50,000 करोड़ रुपये तय की है।
निवेशकों के लिए ग्रीनशू विकल्प और सुविधा
सरकार ने कहा है कि प्रत्येक प्रतिभूति के लिए 2,000 करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त अभिदान बनाए रखने हेतु ग्रीनशू विकल्प का प्रयोग किया जाएगा। इसके अलावा, नीलामियों में गैर-प्रतिस्पर्धी बोली की सुविधा उपलब्ध रहेगी, जिसमें 5% हिस्सा खुदरा निवेशकों के लिए आरक्षित होगा।