जवाहर नवोदय में पर्वतीय जनपद विज्ञान महोत्सव का शुभारंभ, सीएम द्वारा विद्यालय के लिए 50 लाख की घोषणा

जवाहर नवोदय में पर्वतीय जनपद विज्ञान महोत्सव का शुभारंभ, सीएम द्वारा विद्यालय के लिए 50 लाख की घोषणा

गुप्तकाशी, 15 अक्टूबर। उत्तराखण्ड विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकोस्ट), सूचना प्रौद्योगिकी, सुराज एवं विज्ञान प्रौद्योगिकी विभाग, उत्तराखण्ड सरकार द्वारा वर्ष 2025-26 के चतुर्थ सीमांत पर्वतीय जनपद बाल विज्ञान महोत्सव का राज्य स्तरीय शुभारंभ आज सीमांत जनपद रुद्रप्रयाग के पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, बनसू, जाखधार, गुप्तकाशी में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ।

मुख्यमंत्री ने किया दीप प्रज्वलन, बाल वैज्ञानिकों से की बातचीत

मुख्यमंत्री धामी ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। तत्पश्चात उन्होंने विभिन्न जनपदों से आए बाल वैज्ञानिकों से संवाद स्थापित किया और उनकी शंकाओं का समाधान किया।
कार्यक्रम में बाल वैज्ञानिकों ने जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक जल संसाधन संरक्षण, आपदा प्रबंधन, ऊर्जा संरक्षण और विज्ञान-प्रौद्योगिकी जैसे विषयों पर मुख्यमंत्री से चर्चा की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस भव्य आयोजन से सीमांत जनपदों के बाल वैज्ञानिकों को नई दिशा और अवसर प्राप्त होंगे। इस अवसर पर उन्होंने यूकोस्ट की “रुद्रप्रयाग डैशबोर्ड पुस्तक” का विमोचन भी किया। यह जीआईएस आधारित रिमोट सिस्टम डैशबोर्ड है, जिसमें विभिन्न विभागों की योजनाओं से जुड़ी जानकारियाँ एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगी।

सीमांत जिलों में स्थापित होंगे नवाचार केंद्र

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सीमांत जनपदों में अब ऐसे नवाचार केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जहाँ आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी जानकारी व प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह पहल सीमांत क्षेत्रों के सतत विकास और वैज्ञानिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

उत्कृष्ट कार्य करने वालों का सम्मान

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तित्वों — पद्मश्री कल्याण सिंह रावत, सीमांत क्षेत्र के उद्यमी इंद्र सिंह रावत, और सीमांत सेवा फाउंडेशन के डॉ. पाटनी — को सम्मानित किया।
महोत्सव में कुल छह जनपदों के 238 बाल वैज्ञानिक (90 छात्र और 148 छात्राएँ) शामिल हुए।

भारत विज्ञान और नवाचार में नई ऊँचाइयों पर : मुख्यमंत्री धामी

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज भारत विज्ञान, अनुसंधान और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ छू रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का विजन है —

“नए भारत की गति और दिशा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के नवाचारों पर निर्भर करेगी।”

धामी ने बताया कि विज्ञान और नई तकनीकों के बल पर भारत आज अंतरिक्ष समेत कई क्षेत्रों में अपना परचम लहरा रहा है। उन्होंने कहा कि देहरादून देश की पाँचवीं साइंस सिटी बनने जा रही है, जो उत्तराखण्ड जैसे पर्वतीय राज्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।

ई-गवर्नेंस से पारदर्शी सेवाएँ

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने विभिन्न सरकारी सेवाओं को ई-गवर्नेंस पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया है, जिससे आम जनता को सरल और प्रभावी सेवाएँ मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रदेश में विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार को बढ़ावा देना और सीमांत क्षेत्रों के सतत विकास को प्रोत्साहित करना है।

मुख्यमंत्री की घोषणाएँ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अवसर पर कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ कीं —

  • जवाहर नवोदय विद्यालय, जाखधार के लिए 50 लाख रुपये देने की घोषणा।

  • जनपद में आपदा प्रबंधन केंद्र निर्माण के लिए जिलाधिकारी को कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश।

  • सीमांत क्षेत्र विकास परिषद के गठन की घोषणा और यूकोस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत को आवश्यक कार्रवाई हेतु निर्देश।

महोत्सव की थीम

इस वर्ष के महोत्सव की थीम है —
“जलवायु परिवर्तन अनुकूलन रणनीतियाँ एवं आपदा जोखिम प्रबंधन का एकीकरण”
(Integrated climate change adaptation and mitigation strategies into disaster risk management plans)।
इसका उद्देश्य जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक जल संसाधन संरक्षण और आपदा प्रबंधन जैसे विषयों पर व्यवहारिक रणनीतियाँ विकसित करना है, ताकि पर्वतीय क्षेत्रों में स्थायी और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित हो सके।

कार्यक्रम में विधायक केदारनाथ आशा नौटियाल, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम कठैत, यूकोस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत, महिला एवं बाल विकास उपाध्यक्ष ऐश्वर्या रावत, भाजपा जिलाध्यक्ष भारत भूषण भट्ट, प्रधानाचार्य तिलक सिंह, जिलाधिकारी प्रतीक जैन, एसपी अक्षय प्रहलाद कोंडे, सीडीओ राजेंद्र सिंह रावत, तथा एडीएम श्याम सिंह राणा सहित अनेक अधिकारी एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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