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संशोधनों के बाद भी संविधान की मूल भावना अडिग: ग्राफिक एरा में संविधान दिवस पर विशेष सत्र

संशोधनों के बाद भी संविधान की मूल भावना अडिग: ग्राफिक एरा में संविधान दिवस पर विशेष सत्र

देहरादून, 26 नवंबर। ग्राफिक एरा में छात्रों को संवैधानिक मूल्यों की समझ और कानून के प्रति जागरूकता को अभिव्यक्त किया गया।
ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में 76वें संविधान दिवस के अवसर पर विशेष सत्र का आयोजन किया गया। सत्र को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए अतिरिक्त सिविल जज श्रीमती ममता पंत ने कहा कि पिछले 76 वर्षों में संविधान में 106 संशोधन हुए हैं, लेकिन इसके बाद भी संविधान की आत्मा, सिद्धांत और राष्ट्र को एक बनाए रखने की शक्ति अद्वितीय है। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान की सबसे बड़ी खूबी है की वह समय के साथ बदलते हुए हालातों के अनुसार खुद को ढाल लेता है और आज भी उसकी मूल भावना वैसी ही है। श्रीमती पंत ने डा. भीमराव अंबेडकर के दृष्टिकोण की सराहना करते हुए कहा कि संविधान निर्माता की सोच ने भारत की लोकतांत्रिक राह तय की है।
सत्र में कुलपति डा. नरपिंदर सिंह ने कहा कि संविधान सिर्फ शासन का ढांचा नहीं बल्कि भारतीय लोकतंत्र की आत्मा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय देश के भविष्य को तैयार करते हैं और छात्रों में नैतिकता संवैधानिक जागरूकता और देशहित की भावना विकसित करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
सत्र का आयोजन ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ लॉ ने किया। सत्र में कुलसचिव डा. नरेश कुमार शर्मा, डीन स्कूल ऑफ लॉ डा. डेजी़ एलेक्जेंडर, डीन स्कूल ऑफ डिजाइन डा. सौरभ कुमार, डा. वी. पी. उनियाल समेत अन्य शिक्षक शिक्षिकाएं और छात्र-छात्र शामिल रहे। सत्र का संचालन अपराजिता कुमार ने किया।