ज्योतिष महाकुंभ के समापन में पहुंचे राज्यपाल, बोले— ज्योतिष केवल भविष्य नहीं, राष्ट्र चेतना भी जगाती है

ज्योतिष महाकुंभ के समापन में पहुंचे राज्यपाल, बोले— ज्योतिष केवल भविष्य नहीं, राष्ट्र चेतना भी जगाती है

देहरादून। अमर उजाला–ग्राफिक एरा ज्योतिष महाकुंभ 2026 के दूसरे दिन शनिवार को समापन सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि ज्योतिष विद्या केवल भविष्य बताने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र चेतना को जागृत करने वाली दिव्य विद्या भी है। उन्होंने ज्योतिष को प्रभु का वरदान बताते हुए कहा कि ज्योतिष महाकुंभ जैसे आयोजन इस प्राचीन ज्ञान को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं।

8वें अमर उजाला–ग्राफिक एरा ज्योतिष महाकुंभ का शुभारंभ शनिवार को हुआ था। उद्घाटन सत्र में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह आयोजन प्राचीन एवं दिव्य ज्ञान में निहित वैज्ञानिक रहस्यों को आमजन तक पहुंचाने का सराहनीय प्रयास है। उन्होंने कहा कि इस पहल से प्राप्त निष्कर्ष मानव जीवन की जटिलताओं, सामाजिक समस्याओं के समाधान और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के लिए सार्थक मार्गदर्शन प्रदान करेंगे।

मुख्यमंत्री ने भारतीय सनातन संस्कृति की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत में ज्ञान, विज्ञान और अध्यात्म का अद्वितीय संगम देखने को मिलता है। ज्योतिष भारत का अत्यंत समृद्ध, गूढ़ और वैज्ञानिक शास्त्र है। जिन खगोलीय घटनाओं को आधुनिक विज्ञान विशाल यंत्रों के माध्यम से समझने का प्रयास करता है, उनके मूल सिद्धांत हमारे ऋषि-मुनियों ने हजारों वर्ष पूर्व ही ग्रह-नक्षत्रों की गति और समय-चक्र के गहन अध्ययन से स्थापित कर लिए थे। उन्होंने यह भी कहा कि आज नासा भी भारतीय ज्योतिष विज्ञान की उपयोगिता को स्वीकार कर रहा है।

कार्यक्रम के दौरान कन्या गुरुकुल महाविद्यालय, देहरादून की छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की, वहीं डमरू मंडल की टीम ने पारंपरिक डमरू वादन से माहौल को भक्तिमय बना दिया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ज्योतिषाचार्यों को सम्मानित भी किया।

पंडित पुरुषोत्तम गौड़ को ‘ज्योतिष तपस्वी सम्मान’

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित पुरुषोत्तम गौड़ को ‘ज्योतिष तपस्वी सम्मान’ (लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड) से सम्मानित किया। उन्हें यह सम्मान ज्योतिष, वैदिक शास्त्र और आध्यात्मिक चिंतन के क्षेत्र में किए गए उनके उल्लेखनीय शोध और योगदान के लिए प्रदान किया गया।
पंडित गौड़ अपनी विलक्षण प्रश्न-विवेचन क्षमता के लिए जाने जाते हैं, जिसमें वे बिना प्रश्न पूछे ही प्रश्न-पत्र तैयार कर सटीक और तार्किक उत्तर प्रस्तुत करते हैं। सम्मान प्राप्त करने पर उन्होंने कहा कि उत्तराखंड उनके गुरु हैड़ाखान महाराज की तपोभूमि है और यह सम्मान वे अपने गुरुदेव के चरणों में समर्पित करते हैं।

ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय के सिल्वर जुबली कन्वेंशन सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में पंडित के.ए. दुबे पदमेश ने भी विचार रखते हुए कहा कि आने वाले समय में ज्योतिष विद्या समाज में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने की क्षमता रखती है।