बदरीनाथ धाम से शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को विशेष निमंत्रण, गाडू घड़ा यात्रा में शामिल होने का आग्रह

बदरीनाथ धाम से शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को विशेष निमंत्रण, गाडू घड़ा यात्रा में शामिल होने का आग्रह

चमोली/देहरादून। प्रयागराज में मौनी अमावस्या के गंगा स्नान को लेकर हुए विवाद के बाद ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज पहली बार उत्तराखंड पहुंचने वाले हैं। प्रयागराज से बिना गंगा स्नान किए काशी पहुंचे शंकराचार्य ने उत्तर प्रदेश सरकार को गौमाता को राज्य माता का दर्जा देने के लिए 40 दिनों का अल्टीमेटम दिया था। इसी बीच बदरीनाथ धाम से जुड़ा एक अहम धार्मिक संकेत सामने आया है।
श्री बदरीनाथ धाम के पुजारी समुदाय की शीर्ष संस्था श्री बदरीनाथ डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने से पूर्व निकलने वाली गाडू घड़ा यात्रा में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण भेजा है। पंचायत अध्यक्ष पंडित आशुतोष डिमरी ने बताया कि यह निमंत्रण पुजारी समुदाय की ओर से भगवान बदरी विशाल के तेल कलश (गाडू घड़ा) के ऋषिकेश से बदरीनाथ धाम प्रस्थान के अवसर पर दिया गया है।
धार्मिक जानकारों के अनुसार, गाडू घड़ा यात्रा बदरीनाथ धाम की अत्यंत महत्वपूर्ण परंपरा मानी जाती है। ऐसे समय में शंकराचार्य को इस यात्रा में आमंत्रित किया जाना उनके पद को लेकर चल रहे विवादों के बीच एक बड़ा धार्मिक संदेश माना जा रहा है। उल्लेखनीय है कि उत्तर दिशा की शंकराचार्य पीठ ज्योतिषपीठ, बदरीनाथ धाम से ही जुड़ी हुई है।
बताया गया है कि इस वर्ष 23 अप्रैल 2026 को बदरीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। इससे पूर्व 7 अप्रैल से गाडू घड़ा यात्रा का शुभारंभ होगा। परंपरा के अनुसार नरेंद्र नगर राजदरबार में तिलों का तेल पारंपरिक विधि से निकाला जाता है, जिसका उपयोग भगवान बदरी विशाल के लेप और अखंड ज्योति में किया जाता है।
अब यह देखना अहम होगा कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद उत्तराखंड के इस धार्मिक निमंत्रण को स्वीकार करते हैं या नहीं, और उनके 40 दिनों के अल्टीमेटम पर उत्तर प्रदेश सरकार क्या रुख अपनाती है।