देहरादून। आगामी चारधाम यात्रा को देखते हुए केदारनाथ धाम के लिए संचालित होने वाली हेली सेवाओं पर इस वर्ष कड़े नियम लागू किए गए हैं। यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) के निर्देशों के अनुसार अब सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद किसी भी हेलिकॉप्टर उड़ान की अनुमति नहीं होगी। इसके साथ ही खराब मौसम की स्थिति में हेली सेवाओं का संचालन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
बीते वर्ष केदारनाथ घाटी और उत्तरकाशी क्षेत्र में हुए हेलिकॉप्टर हादसों में कुल 13 लोगों की मौत के बाद राज्य सरकार ने हेली सेवाओं की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सख्त करने का निर्णय लिया है। पर्वतीय क्षेत्रों की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और अचानक बदलने वाले मौसम को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।
चारधाम यात्रा के दौरान विशेष रूप से केदारनाथ धाम के लिए हेली सेवा की भारी मांग रहती है, लेकिन सुरक्षा कारणों से अब उड़ानों की संख्या में लगभग 30 प्रतिशत की कटौती की गई है। DGCA के अनुसार केवल उन्हीं पायलटों की तैनाती की जाएगी, जिन्हें उच्च हिमालयी क्षेत्रों में उड़ान का पर्याप्त अनुभव होगा। मौसम विभाग की चेतावनी मिलते ही उड़ानों को तत्काल रोका जाएगा।
गौरतलब है कि 15 जून 2025 को केदारनाथ से गुप्तकाशी लौट रहा एक हेलिकॉप्टर गौरी माई खर्क क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें पायलट समेत सात लोगों की मौत हो गई थी। इससे पहले 8 मई 2025 को उत्तरकाशी के गंगनानी में हुए हेलिकॉप्टर हादसे में छह लोगों की जान चली गई थी। वहीं 17 मई 2025 को केदारनाथ धाम के पास एक हेली एंबुलेंस भी दुर्घटनाग्रस्त हुई थी।
उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशीष चौहान ने बताया कि सुरक्षित हेली सेवा संचालन के लिए बीते वर्ष लागू मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) इस बार भी पूरी सख्ती के साथ लागू रहेगी। हेली सेवाओं के संचालन के लिए टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाएगी और नियमों के पालन की कड़ी निगरानी की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यात्रियों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।