उत्तराखंड में दोहरी पेंशन घोटाला उजागर: 970 लोगों की पेंशन रोकी गई, 12 साल से चल रहा था खेल

उत्तराखंड में दोहरी पेंशन घोटाला उजागर: 970 लोगों की पेंशन रोकी गई, 12 साल से चल रहा था खेल

देहरादून: उत्तराखंड में दोहरी पेंशन लेने का बड़ा मामला सामने आया है। कैग (CAG) के डाटा विश्लेषण और सत्यापन के बाद समाज कल्याण विभाग ने कार्रवाई करते हुए 970 लोगों की पेंशन पर रोक लगा दी है। ये वे लोग हैं, जो अपने मूल विभाग से पेंशन लेने के साथ-साथ समाज कल्याण विभाग से भी पेंशन प्राप्त कर रहे थे।

समाज कल्याण विभाग के अनुसार कुल 1377 प्रकरण सामने आए हैं, जिनमें से 93 लाभार्थियों की मृत्यु हो चुकी थी, जबकि 314 लोगों को सत्यापन के बाद अन्य कारणों से पोर्टल से हटा दिया गया। शेष 970 लोग अभी तक दोहरी पेंशन ले रहे थे, जिनकी पेंशन अब तत्काल प्रभाव से रोक दी गई है।

यह मामला तब उजागर हुआ जब कैग ने विभिन्न विभागों से सेवानिवृत्त कर्मचारियों और समाज कल्याण विभाग की पेंशन सूची का डाटा मिलान किया। जांच में सामने आया कि कई लोग अपने विभागीय पेंशन के साथ-साथ राज्य आंदोलनकारी पेंशन, स्वतंत्रता सेनानी पेंशन या अन्य सामाजिक पेंशन योजनाओं का भी लाभ उठा रहे थे। कैग ने इस संबंध में शासन को पत्र भेजा, जिसके बाद विभागों में हड़कंप मच गया।

राज्य आंदोलनकारी पेंशन भी ले रहे 565 लोग

समाज कल्याण विभाग के अनुसार, दोहरी पेंशन लेने वाले 970 लोगों में से 565 लोग राज्य आंदोलनकारी या स्वतंत्रता सेनानी पेंशन भी ले रहे हैं। शेष 405 मामलों में यह स्पष्ट नहीं है कि वे किस अन्य विभाग से पेंशन प्राप्त कर रहे हैं, जिसके लिए ट्रेजरी विभाग से विस्तृत जानकारी मांगी गई है।

12 साल से चल रही थी गड़बड़ी

जांच में यह भी सामने आया है कि दोहरी पेंशन लेने की यह गड़बड़ी हालिया नहीं, बल्कि वर्ष 2013–14 से लगातार चल रही थी। इतने लंबे समय तक मामला सामने न आना विभागीय निगरानी प्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है।

समाज कल्याण निदेशक डॉ. संदीप तिवारी ने बताया कि प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है और 970 लोगों की पेंशन रोकने की सूचना दे दी गई है। उन्होंने कहा कि विस्तृत रिपोर्ट जल्द शासन को सौंपी जाएगी, जिसके बाद रिकवरी और आगे की कानूनी कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।

फिलहाल समाज कल्याण विभाग ट्रेजरी विभाग के सहयोग से पूरे मामले की गहन जांच में जुटा है, ताकि सभी दोषी प्रकरणों की पहचान कर सरकारी धन की वसूली सुनिश्चित की जा सके।