हरेला 2026: नगर निगम देहरादून का मेगा अभियान, 70 हजार पौधे लगेंगे, 5 लाख सब्जी की पौध होगी वितरित

हरेला 2026: नगर निगम देहरादून का मेगा अभियान, 70 हजार पौधे लगेंगे, 5 लाख सब्जी की पौध होगी वितरित

देहरादून। उत्तराखंड के लोकपर्व हरेला 2026 के अवसर पर नगर निगम देहरादून ने “हरित देहरादून – स्वच्छ देहरादून” थीम के तहत एक माह तक चलने वाले व्यापक पौधरोपण और पौध वितरण अभियान की शुरुआत की है। यह अभियान 16 जुलाई से शुरू होकर अगले एक माह तक चलेगा, जिसमें शहरभर में हजारों पौधे लगाए जाएंगे और लाखों सब्जी की पौध नागरिकों तक पहुंचाई जाएगी।
नगर निगम ने ‘मिशन पोषण संकल्प’ के तहत स्वयं सहायता समूहों और वार्ड पार्षदों के सहयोग से 4 से 5 लाख सब्जियों की पौध घर-घर वितरित करने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों में सहजन (मोरिंगा) के पौधे लगाए जाएंगे।
अभियान के दौरान शहर के सार्वजनिक स्थलों, पार्कों और चिन्हित हरित क्षेत्रों में 70 हजार फलदार, छायादार और चारा प्रजाति के पौधों का रोपण किया जाएगा। लगाए गए प्रत्येक पौधे की जीपीएस मैपिंग और ग्रीन रजिस्टर में पंजीकरण कर उनके संरक्षण और नियमित निगरानी की व्यवस्था भी की जाएगी।

नगर आयुक्त के निर्देश पर विभिन्न अधिकारियों को पार्कों और अतिक्रमण मुक्त भूमि पर पौधरोपण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। गढ़वाल राइफल्स के सहयोग से नगर निगम की अतिक्रमण मुक्त भूमि पर भी विशेष वृक्षारोपण अभियान चलाया जाएगा, जहां लगाए गए पौधों के संरक्षण की जिम्मेदारी गढ़वाल राइफल्स निभाएगी।

अभियान के तहत 16 जुलाई को स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा डोर-टू-डोर पौध वितरण किया जाएगा। इसके बाद स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों, पार्कों, आरडब्ल्यूए, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक स्थलों पर क्रमवार पौधरोपण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

पौधरोपण के लिए तपोवन (आमवाला), सहस्रधारा वर्कशॉप, मंदाकिनी विहार, नालापानी, शीशमबाड़ा प्लांट, देहराखास समेत कई स्थान चिन्हित किए गए हैं।

नगर आयुक्त ने सभी नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, स्वयं सहायता समूहों, विद्यालयों और सामाजिक संस्थाओं से इस अभियान में बढ़-चढ़कर भागीदारी करने की अपील करते हुए कहा कि हरेला केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण का जनआंदोलन है। यदि प्रत्येक नागरिक एक पौधा लगाकर उसके संरक्षण का संकल्प ले, तो देहरादून को और अधिक हरित, स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सकता है।