देहरादून। उत्तराखंड में स्थापित किए जा रहे खेल विश्वविद्यालय के लिए 94 शैक्षणिक, शिक्षणेतर, कोचिंग और प्रशासनिक पदों के सृजन को मंजूरी दे दी गई है। राज्यपाल की स्वीकृति के बाद शासन की ओर से इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया गया है।
शासनादेश के अनुसार खेल विश्वविद्यालय के स्पोर्ट्स कोचिंग विंग में 39 पद सृजित किए गए हैं। इनमें प्रधान कोच, मुख्य कोच, कोच एवं प्रशिक्षक तथा सहायक कोच एवं प्रशिक्षक के पद शामिल हैं। वहीं अकादमिक एवं संकाय के लिए 14 पद स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें खेल प्रबंधन और खेल विज्ञान से जुड़े पद शामिल हैं।
खिलाड़ियों की फिटनेस और रिकवरी पर भी फोकस
खिलाड़ियों की फिटनेस और रिकवरी के लिए खेल चिकित्सक, फिजियोथेरेपिस्ट, खेल मनोवैज्ञानिक, नर्स और वार्ड सहायक समेत 12 पदों को भी मंजूरी दी गई है। इसके अलावा कुलपति, कुलसचिव, उपकुलपति, परीक्षा नियंत्रक और वित्त अधिकारी सहित प्रशासनिक एवं वित्तीय संचालन से जुड़े पद भी स्वीकृत किए गए हैं।
खेल मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि खेल विश्वविद्यालय में खेल विज्ञान, खेल प्रबंधन और आधुनिक कोचिंग की सुविधाएं उपलब्ध होने से प्रदेश के प्रतिभावान खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण मिलेगा। इससे खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मिल सकेंगे। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को भी चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जाएगा।
सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और पैरामेडिकल कॉलेज के प्रस्ताव भी आगे बढ़े
वहीं उत्तराखंड में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और पैरामेडिकल कॉलेज की स्थापना से जुड़े प्रस्तावों को केंद्र सरकार ने विभागीय परीक्षण के लिए भेजा है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र भेजकर इसकी जानकारी दी है।
पत्र के अनुसार हेमवती नंदन बहुगुणा उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय के अंतर्गत सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की स्थापना के प्रस्ताव का संबंधित विभाग की ओर से परीक्षण किया जा रहा है। इसी विश्वविद्यालय के अंतर्गत पैरामेडिकल कॉलेज स्थापित करने के प्रस्ताव को भी संबंधित विभाग के परीक्षण के लिए भेजा गया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दोनों संस्थानों की स्थापना के प्रस्ताव केंद्र सरकार के समक्ष रखे थे। राज्य सरकार का मानना है कि सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की स्थापना से उत्तराखंड में उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधाओं को मजबूती मिलेगी। वहीं पैरामेडिकल कॉलेज के माध्यम से प्रशिक्षित पैरामेडिकल मानव संसाधन तैयार करने में मदद मिलेगी।