चमोली। उत्तराखंड के चमोली जिले की उर्गम घाटी में स्थित प्रसिद्ध वंशी नारायण मंदिर के कपाट शुक्रवार को रक्षाबंधन के पर्व पर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। वर्ष में केवल एक दिन खुलने वाले इस मंदिर में भगवान नारायण के दर्शन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया। दूर-दराज के गांवों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की।
समुद्रतल से करीब 12 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित वंशी नारायण मंदिर उर्गम घाटी से लगभग 12 किलोमीटर की दूरी पर है। कत्यूर शैली में निर्मित इस मंदिर में भगवान नारायण की चतुर्भुज प्रतिमा विराजमान है। रक्षाबंधन के दिन ही मंदिर के कपाट खोलने की परंपरा के कारण यहां विशेष धार्मिक आयोजन किए जाते हैं।
कलगोठ गांव के ग्रामीणों की विशेष भूमिका
मंदिर की पूजा-अर्चना में कलगोठ गांव के ग्रामीणों की विशेष भूमिका रहती है। रक्षाबंधन के अवसर पर ग्रामीण अपने घरों से दूध और मक्खन लेकर मंदिर पहुंचते हैं। भगवान नारायण को भोग लगाने के लिए मक्खन का उपयोग किया जाता है, जबकि दूध से अभिषेक की परंपरा निभाई जाती है।
पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाता है। इस अवसर पर भगवान नारायण का विशेष श्रृंगार कर उन्हें रक्षासूत्र भी अर्पित किया जाता है।
मान्यता है, सालभर नारद करते हैं पूजा
वंशी नारायण मंदिर को लेकर स्थानीय स्तर पर कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। मान्यता है कि देवर्षि नारद वर्षभर भगवान नारायण की पूजा करते हैं और रक्षाबंधन के दिन श्रद्धालुओं को यहां पूजा और दर्शन का अवसर मिलता है। इसी कारण मंदिर के कपाट खुलने वाले इस एक दिन को विशेष धार्मिक महत्व दिया जाता है।
राजा बलि से जुड़ी है पौराणिक कथा
मंदिर से जुड़ी पौराणिक मान्यता भगवान विष्णु के वामन अवतार और राजा बलि से संबंधित है। मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु राजा बलि को द्वारपाल बनाकर पाताल लोक चले गए थे। काफी समय तक भगवान विष्णु के दर्शन न होने पर माता लक्ष्मी चिंतित हुईं।
कहा जाता है कि देवर्षि नारद ने माता लक्ष्मी को श्रावण पूर्णिमा के दिन राजा बलि को रक्षासूत्र बांधकर भगवान विष्णु को मुक्त कराने का उपाय बताया। इसके बाद माता लक्ष्मी ने राजा बलि को रक्षासूत्र बांधा और उपहार में भगवान विष्णु को मांग लिया। इससे भगवान विष्णु पाताल लोक से मुक्त हुए।
स्थानीय मान्यता के अनुसार पाताल लोक से लौटने के बाद भगवान नारायण सबसे पहले इसी स्थान पर प्रकट हुए थे। वर्ष में केवल एक दिन कपाट खुलने और विशेष पूजा होने के कारण वंशी नारायण मंदिर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान बेहद खास है। रक्षाबंधन पर यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु भगवान नारायण के दुर्लभ दर्शन को विशेष सौभाग्य मानते हैं।
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