दून अस्पताल में नवजात बदलने का आरोप, परिजनों ने स्वास्थ्य मंत्री से लगाई DNA जांच की गुहार

दून अस्पताल में नवजात बदलने का आरोप, परिजनों ने स्वास्थ्य मंत्री से लगाई DNA जांच की गुहार

देहरादून। दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय एक बार फिर विवादों में है। अस्पताल में भर्ती एक महिला के परिजनों ने अस्पताल के कर्मचारियों पर नवजात बच्चा बदलने का गंभीर आरोप लगाया है। परिवार का दावा है कि महिला ने बेटे को जन्म दिया था, लेकिन बाद में उन्हें बेटी सौंप दी गई। मामले की निष्पक्ष जांच और डीएनए टेस्ट की मांग को लेकर परिजनों ने शनिवार को स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के सामने अपनी शिकायत रखी।
स्वास्थ्य मंत्री के अस्पताल निरीक्षण के दौरान परिजनों ने पूरे मामले की जानकारी दी और डीएनए जांच कराने की मांग की। मामले को गंभीरता से लेते हुए मंत्री ने चिकित्सा शिक्षा निदेशक को जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर डीएनए टेस्ट भी कराया जाएगा, ताकि स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सके।

22 अगस्त को अस्पताल में भर्ती हुई थी महिला
पीड़ित परिवार के सदस्य सुमित कुमार के अनुसार उनकी पत्नी का गर्भावस्था के दौरान दून अस्पताल से ही इलाज चल रहा था। प्रसव का समय नजदीक आने पर उन्हें 22 अगस्त को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिवार का आरोप है कि डॉक्टरों ने पहले सामान्य प्रसव की बात कही थी, लेकिन दो दिन बाद ऑपरेशन की जरूरत बताई गई।

सिजेरियन डिलीवरी के बाद बढ़ा विवाद
परिजनों के मुताबिक 24 अगस्त को महिला की सिजेरियन डिलीवरी की गई। सुमित का आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई और जन्म के बाद नवजात को भी उनकी पत्नी को नहीं दिखाया गया।
परिवार का दावा है कि ऑपरेशन के बाद उन्हें दिए गए दस्तावेज में नवजात का जेंडर मेल दर्ज था। हालांकि, जब बच्चा उन्हें सौंपा गया तो वह लड़की थी। इसके बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन से सीसीटीवी फुटेज दिखाने और मामले की जांच कराने की मांग की।

परिवार ने की DNA जांच की मांग
सुमित कुमार का कहना है कि उन्होंने मामले की स्थिति स्पष्ट करने के लिए डीएनए टेस्ट कराने की मांग की, लेकिन अब तक जांच नहीं हो पाई। परिवार का आरोप है कि उनकी शिकायत पर तत्काल कार्रवाई नहीं की गई। स्वास्थ्य मंत्री के सामने मामला रखने के बाद उन्हें जांच की उम्मीद है।

स्वास्थ्य मंत्री ने दिए जांच के निर्देश
स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि मामले में फिलहाल भ्रम की स्थिति है, जिसे दूर करना जरूरी है। उन्होंने चिकित्सा शिक्षा निदेशक को पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। साथ ही कहा कि आवश्यकता पड़ने पर डीएनए टेस्ट भी कराया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि कई बार गलतफहमियों से माहौल खराब होता है और अस्पताल की छवि भी प्रभावित होती है। इसलिए जांच के बाद यह स्पष्ट होना चाहिए कि मामला महज गलतफहमी का है या वास्तव में कोई अनियमितता हुई है।