WHO की चेतावनी: 2050 तक दोगुने हो सकते हैं कैंसर के मामले, AI समेत नई तकनीक से इलाज में बदलाव
नई दिल्ली: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की चेतावनी के मुताबिक, दुनिया में कैंसर के मामलों की संख्या 2050 तक लगभग दोगुनी हो सकती है। बढ़ती उम्र, बदलती जीवनशैली, धूम्रपान, मोटापा और पर्यावरणीय कारकों को कैंसर के बढ़ते बोझ से जुड़े प्रमुख कारणों में शामिल किया जाता है। ऐसे में कैंसर की रोकथाम, समय पर जांच और आधुनिक उपचार तक पहुंच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
AI और जीनोमिक्स से बदल रहा कैंसर का इलाज
कैंसर की पहचान और उपचार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), जीनोमिक्स और एडवांस्ड डायग्नोस्टिक्स जैसी तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इन तकनीकों की मदद से बीमारी का पहले पता लगाने और मरीज की जरूरत के अनुसार उपचार की योजना बनाने में मदद मिल सकती है।
जयपुर के सीके बिड़ला हॉस्पिटल्स के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी एवं रेडियोसर्जरी विभाग के एडिशनल डायरेक्टर डॉ. रुचिर भंडारी के अनुसार, मेडिकल इमेजिंग और आधुनिक रेडिएशन तकनीकों में तेजी से विकास हुआ है। IMRT, VMAT और डोज पेंटिंग जैसी तकनीकें ट्यूमर को अधिक सटीक तरीके से रेडिएशन देने और आसपास के स्वस्थ ऊतकों को बचाने में मदद करती हैं।
बिना सर्जरी कुछ कैंसर के उपचार में मददगार रेडियोसर्जरी
डॉ. भंडारी के अनुसार, SRS और SBRT जैसी रेडियोसर्जरी तकनीकों का इस्तेमाल कुछ शुरुआती स्टेज के प्रोस्टेट, फेफड़े और लिवर कैंसर तथा कुछ ब्रेन ट्यूमर के उपचार में किया जा रहा है। इन तकनीकों में लक्षित हिस्से तक अधिक सटीक तरीके से रेडिएशन पहुंचाया जाता है।
वहीं, ऑनलाइन अडैप्टिव रेडियोथेरेपी (oART) में मरीज की उपचार के समय की शारीरिक स्थिति के आधार पर रेडिएशन प्लान में बदलाव किया जा सकता है। इससे ट्यूमर को लक्षित करते हुए आसपास के महत्वपूर्ण अंगों को सुरक्षित रखने में मदद मिलती है।
कैंसर के बढ़ते मामलों को देखते हुए विशेषज्ञ समय पर स्क्रीनिंग, शुरुआती पहचान और गुणवत्तापूर्ण उपचार तक समान पहुंच को महत्वपूर्ण मानते हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं और प्रशिक्षित कैंसर विशेषज्ञों में निवेश के साथ नई तकनीकों को अधिक लोगों तक पहुंचाने की जरूरत भी बताई जा रही है।