देहरादून: उत्तराखंड में व्यावसायिक पोल्ट्री फार्म शुरू करने की योजना बना रहे उद्यमियों को राज्य सरकार की कुक्कुट विकास नीति-2025 के तहत 63 लाख रुपये तक का अनुदान मिल सकता है। इस नीति का उद्देश्य प्रदेश में पोल्ट्री कारोबार को बढ़ावा देना, निवेश के नए अवसर पैदा करना और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को प्रोत्साहित करना है। योजना के तहत मैदानी क्षेत्रों में परियोजना लागत का 30 प्रतिशत और पर्वतीय क्षेत्रों में 40 प्रतिशत तक अनुदान देने का प्रावधान है। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2029-30 तक प्रदेश में 54 पोल्ट्री इकाइयां स्थापित करने का लक्ष्य रखा है।
किस पोल्ट्री फार्म पर कितना अनुदान?
कुक्कुट विकास नीति-2025 के तहत व्यावसायिक लेयर फार्म और ब्रायलर पैरेंट फार्म स्थापित करने के लिए आर्थिक सहायता का प्रावधान है।
मैदानी क्षेत्रों में 30 हजार पक्षियों की क्षमता वाले लेयर फार्म की परियोजना लागत 1.80 करोड़ रुपये निर्धारित है। इस पर अधिकतम 54 लाख रुपये का अनुदान मिल सकता है। पर्वतीय क्षेत्रों में 15 हजार पक्षियों की क्षमता वाले लेयर फार्म के लिए 48 लाख रुपये तक की सब्सिडी का प्रावधान है।
ब्रायलर पैरेंट फार्म के मामले में मैदानी क्षेत्रों में 10 हजार पक्षियों की क्षमता वाली इकाई की परियोजना लागत 2.10 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। इस पर अधिकतम 63 लाख रुपये का अनुदान मिल सकता है। वहीं, पर्वतीय क्षेत्रों में पांच हजार पक्षियों की क्षमता वाले ब्रायलर पैरेंट फार्म के लिए 1.40 करोड़ रुपये की परियोजना लागत पर 56 लाख रुपये तक सहायता का प्रावधान है।
पोल्ट्री फार्म के लिए जमीन और बैंक की सहमति जरूरी
योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक के पास उत्तराखंड में भूमि का स्वामित्व होना चाहिए। यदि अपनी जमीन नहीं है, तो कम से कम 10 वर्ष का पंजीकृत पट्टा समझौता होना अनिवार्य है। भूमि विवादग्रस्त नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा, आवेदन के समय बैंक का सहमति पत्र भी जमा करना होगा।
कौन कर सकता है आवेदन?
नीति के तहत आवेदन करने के लिए उत्तराखंड का अधिवासी होना अनिवार्य नहीं है। भारतीय नागरिक, अनिवासी भारतीय (एनआरआई) और अन्य देशों के उद्यमी भी निर्धारित शर्तों के अनुसार आवेदन कर सकते हैं। व्यक्तिगत आवेदकों के साथ साझेदारी फर्म, कंपनियां और स्टार्टअप भी पात्र हैं।
पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर मिलेगी मंजूरी
मुख्य पशुपालन अधिकारी डॉ. आशुतोष जोशी के अनुसार, राज्य में निर्धारित अवधि के दौरान कुल 54 पोल्ट्री इकाइयां स्थापित करने का लक्ष्य है। इनमें 26 इकाइयां मैदानी और 28 पर्वतीय क्षेत्रों में प्रस्तावित हैं। परियोजनाओं को पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर मंजूरी दी जाएगी। हालांकि, अनुदान की स्वीकृति बजट की उपलब्धता पर निर्भर करेगी।
छोटी इकाइयों और आधुनिक तकनीक को भी प्रोत्साहन
निर्धारित क्षमता से छोटी पोल्ट्री इकाइयां स्थापित करने वाले उद्यमी एमएसएमई नीति के तहत उपलब्ध लाभ ले सकते हैं। इसके अलावा, पोल्ट्री कारोबार में उन्नत तकनीक अपनाने पर नवाचार प्रोत्साहन के रूप में अधिकतम एक लाख रुपये देने का प्रावधान भी बताया गया है।
योजना में रुचि रखने वाले उद्यमियों को आवेदन से पहले संबंधित पशुपालन विभाग से पात्रता, परियोजना लागत, अनुदान की शर्तों और जरूरी दस्तावेजों की पुष्टि करनी चाहिए।