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उत्तराखंड मूल की महिलाओं को राज्‍य सिव‍िल सेवा में 30 पर्सेंट आरक्षण पर HC ने लगाई रोक

उत्तराखंड मूल की महिलाओं को राज्‍य सिव‍िल सेवा में 30 पर्सेंट आरक्षण पर HC ने लगाई रोक

रेनबो न्यूज़ इंडिया* 25अगस्त 2022

देहरादून:उत्तराखंड हाई कोर्ट (Uttarakhand High Court) ने प्रदेश की स्थायी निवासी महिलाओं को राज्य सिविल सेवाओं (uttarakhand state services) में 30 प्रतिशत आरक्षण देने वाले वर्ष 2006 के आदेश पर बुधवार को रोक लगा दी। मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति आर सी खुल्बे ने यह निर्देश राज्य के बाहर की एक दर्जन से अधिक महिला उम्मीदवारों की याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया। याचिकाकर्ता महिलाएं अनारक्षित श्रेणी में आती हैं।

उनकी याचिका में कहा गया है कि उन्हें (राज्य के बाहर की महिला उम्मीदवारों को) इस साल 3 अप्रैल को आयोजित की गई राज्य सिविल सेवा की प्रांरभिक परीक्षा (पीटी) में राज्य की स्थायी निवासी महिलाओं के लिए निर्धारित न्यूनतम अंक (कट-ऑफ) से अधिक अंक लाने के बावजूद मुख्य परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी गई। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए अधिवक्ता कार्तिकेय हरी गुप्ता ने दलील दी कि राज्य सरकार का 24 जुलाई 2006 को आरक्षण पर जारी किया गया आदेश संविधान के अनुच्छेद 14,16,19 और 21 का उल्लंघन करता है।

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