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Uttarakhand: तो क्या लैंसडौन का नाम फिर से हो जायेगा कालौं का डांडा

Uttarakhand: तो क्या लैंसडौन का नाम फिर से हो जायेगा कालौं का डांडा

खूबसूरत हिल स्टेशन लैंसडाउन का नाम बदलने की तैयारी, रक्षा मंत्रालय ने मांगी रिपोर्ट

उत्तराखंड राज्य के पौड़ी जिले में स्थित खूबसूरत हिल स्टेशन – सैन्य छावनी क्षेत्र लैंसडाउन का नाम बदलकर ‘कालौं का डांडा (अंधेरे में डूबे पहाड़)’ हो सकता है। स्थानीय स्तर पर लंबे समय से लैंसडाउन का नाम बदलने की मांग होती आई है। इस संबंध में रक्षा मंत्रालय को भी पत्र भेजे जा चुके हैं।

स्थानीय लोग लैंसडाउन का नाम कालौं का डांडा रखने की मांग करते आए हैं। अतः इस सम्बन्ध में रक्षा मंत्रालय ने मांगी रिपोर्ट है। गौरतलब है कि इस शहर का नाम 100 साल से भी अधिक समय से लैंसडाउन है। लैंसडाउन नाम से पहले इस इलाके को ‘कालौं का डांडा’ नाम से पुकारा जाता था। 

रक्षा मंत्रालय ने ब्रिटिश काल में छावनी क्षेत्रों की सड़कों, स्कूलों, संस्थानों, नगरों और उपनगरों के रखे गए नामों को बदलने के लिए उत्तराखंड सब एरिया के साथ सेना के अधिकारियों से प्रस्ताव मांगें हैं। साथ ही उनसे ब्रिटिश काल के समय के नामों के स्थान पर क्या नाम रखे जा सकते हैं, इस बारे में भी सुझाव देने को कहा गया है।

तत्कालीन वायसराय लैंसडाउन के नाम से रखा गया था लैंसडाउन नाम

जानकारी के अनुसार गढ़वाली जवानों की अद्वितीय रणकौशल और वीरता से प्रभावित होकर 1886 में गढ़वाल रेजिमेंट की स्थापना हुई। इसके बाद पांच मई 1887 को लेफिनेंट कर्नल मेरविंग के नेतृत्व में अल्मोड़ा में बनी पहली गढ़वाल रेजीमेंट की पलटन चार नवंबर 1887 को लैंसडाउन पहुंची। उस समय लैंसडाउन को कालौं का डांडा कहते थे। तत्पश्चात इस स्थान का नाम 21 सितंबर 1890 को स्थान का नाम कालौं का डांडा से बदलकर तत्कालीन वायसराय लार्ड लैंसडाउन के नाम पर लैंसडौन रखा गया।

लैंसडाउन 608 हेक्टेयर पहाड़ में फैला है 

आपको बता दे कि लैंसडाउन नगर एक खूबसूरत हिल स्टेशन है और पसंदीदा पर्यटक स्थल भी है।  लैंसडाउन नगर सैन्य छावनी क्षेत्र है और 608 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है। जहां आधे से अधिक भाग में बांज, बुरांश, चीड़ और अन्य वृक्षों के सदाबहार वनों का विस्तार है।

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