इनोवेशन एंड आईपीआर पर कार्यशाला, शोधार्थी के पेटेंट का खर्चा विश्वविद्यालय वहन करेगा: डॉ० जोशी

इनोवेशन एंड आईपीआर पर कार्यशाला, शोधार्थी के पेटेंट का खर्चा विश्वविद्यालय वहन करेगा: डॉ० जोशी

ऋषिकेश (22 नवंबर 2023): पंडित ललित मोहन शर्मा परिसर ऋषिकेश श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला के संयोजक व निदेशक विकास एवं अनुसंधान प्रो० गुलशन कुमार धींगरा ने प्रथम पीचडी शोधार्थियों के साथ ही सभी का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि पेटेंट की जानकारी तथा क्रियान्वन करने तरीकों को सीख कर हम सभी इसका लाभ ले सकते हैं।

विश्वविद्यालय परिसर के निदेशक प्रो० एम एस रावत ने कहा कि इस प्रकार के कार्यशाला बहुत महत्वपूर्ण साबित होंगे। उन्होंने फैकेल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम, रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेल, रिसर्च पब्लिकेशन, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट तथा पेटेंट विषय पर अपने विचार रखे।

शोधार्थी के पेटेंट का खर्चा विश्वविद्यालय वहन करेगा

कार्यशाला के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० एन के जोशी ने कहा कि विश्वविद्यालय का मुख्य उद्देश्य 2025 में  राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद, नैक के अंतर्गत लाना है तथा इसके लिए विश्वविद्यालय के सभी सदस्यों को मिलकर काम करना होगा। साथ ही उन्होंने कहा कि भविष्य में यदि कोई शोधार्थी अपना कोई पेटेंट करता है तो उसका खर्चा विश्वविद्यालय वहन करेगा तथा प्राध्यापक द्वारा पेमेंट करने पर 50% विश्वविद्यालय वहन करेगा। उन्होंने ईआरपी सॉफ्टवेयर के जरिए विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के पूरे रिकॉर्ड को क्रमबद्ध रखेगा।

मुख्य वक्ता व विशेषज्ञ द्वारा अपने वक्तव्य में नवाचार एवं नवीन प्रवृत्तियां पर शोधार्थियों को बताते हुए कहा कि नवप्रवर्तन चक्र में अभी हम छठी लहर में हैं। उन्होंने कहा कि हमें सोचने समझने की क्षमता का विकास करना चाहिए तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के महत्व के बारे में तथा उसके सही इस्तेमाल के बारे में जानकारी दी।

विषय विशेषज्ञ ने बौद्धिक संपदा अधिकार तथा पेटेंट को करने के तरीके पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया की कोई भी व्यक्ति अपने अनुसार एक नया आविष्कार कर सकते हैं और भारत इस समय विश्व में बौद्धिक संपदा अधिकार  में 40वें स्थान पर है। 

प्रोफेसर डीएम त्रिपाठी ने सभी अतिथियों तथा प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यशाला में विश्वविद्यालय परिसर के समस्त प्राध्यापक तथा शोधार्थियों समेत करीब 120 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

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