उत्तराखंड में हाल के दिनों में बढ़ते वन्यजीव हमलों का मुद्दा आज लोकसभा में गूंज उठा। गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी ने इसे “जन-सुरक्षा का गंभीर संकट” बताते हुए केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने कहा कि पहाड़ों में भालू और गुलदार के हमले खतरनाक स्तर तक बढ़ चुके हैं और ग्रामीणों में भय का माहौल है।
तीन हफ्तों में 4 मौतें, 15 से ज्यादा घायल
सांसद अनिल बलूनी ने बताया कि सिर्फ तीन हफ्तों के भीतर तेंदुए के हमलों में चार लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि भालू के हमले भी अचानक बढ़ गए हैं। अब तक 15 से अधिक लोग घायल हुए हैं।
उन्होंने कहा कि इस गंभीर स्थिति ने पहाड़ों में लोगों का जीवन-दैनंदिन प्रभावित कर दिया है—
- बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे
- महिलाएं जंगल जाने से डर रही हैं
- अंधेरा होते ही गांवों में “कर्फ्यू जैसे हालात” बन जा रहे हैं
संसद में उठाई 3 बड़ी मांगें
लोकसभा में बलूनी ने वन मंत्री भूपेंद्र यादव से तत्काल कार्रवाई की तीन प्रमुख मांगें रखीं—
1. WII की विशेषज्ञ टीम तुरंत भेजी जाए
उन्होंने कहा कि वाइल्ड लाइफ़ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की टीम तत्काल उत्तराखंड भेजी जाए ताकि पता चल सके कि हमलों में अचानक बढ़ोतरी क्यों हुई है।
2. आधुनिक पिंजरों और संसाधनों की आपूर्ति
बलूनी ने कहा कि प्रदेश में आधुनिक पिंजरों और अन्य तकनीकी उपकरणों की भारी कमी है। केंद्र सरकार तुरंत संसाधन उपलब्ध कराए।
3. पीड़ित परिवारों की सहायता
सांसद ने वन विभाग और भारत सरकार से आग्रह किया कि हमलों में अपने परिजनों को खो चुके परिवारों को अधिकतम सहायता दी जाए।
सोशल मीडिया पर भी जताई चिंता
सांसद बलूनी ने इस मुद्दे पर एक्स (Twitter) पर भी पोस्ट कर इसे “जनसुरक्षा का गंभीर संकट” बताया और कहा कि अब देर नहीं की जा सकती—तुरंत ठोस रणनीति लागू की जानी चाहिए।