गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार ने उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित करने की घोषणा की है। यह सम्मान उनके पांच दशकों से अधिक के निष्कलंक सार्वजनिक जीवन, राजनीतिक संघर्ष और समाज सेवा के साथ-साथ अलग उत्तराखंड राज्य आंदोलन में उनके योगदान को भी मान्यता देता है।
सादगीपूर्ण जीवनशैली के कारण ‘गधेरू’ नाम से विख्यात 83 वर्षीय कोश्यारी को यह सम्मान शिक्षा, समाज सेवा और राजनीति के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया है।
आपातकाल के दौरान जेल की यातनाएं सहीं
भगत सिंह कोश्यारी का राजनीतिक जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ाव के साथ प्रारंभ हुआ। वर्ष 1975 में आपातकाल के दौरान इमरजेंसी के खिलाफ सक्रिय भूमिका निभाने पर उन्हें मीसा (Maintenance of Internal Security Act) के तहत गिरफ्तार किया गया।
वे 3 जुलाई 1975 से 23 मार्च 1977 तक लगभग पौने दो वर्ष अल्मोड़ा और फतेहगढ़ सेंट्रल जेल में बंद रहे, जहां उन्हें कई कठिनाइयों और यातनाओं का सामना करना पड़ा।
आपातकाल के बाद राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते हुए वे 1997 में उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य चुने गए।
उत्तराखंड राज्य बनने के बाद महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां
वर्ष 2000 में उत्तरांचल (अब उत्तराखंड) राज्य गठन के बाद भगत सिंह कोश्यारी राज्य सरकार में ऊर्जा, सिंचाई, कानून और विधायी कार्य मंत्री बने।
30 अक्टूबर 2001 को वे राज्य के दूसरे मुख्यमंत्री नियुक्त हुए।
2002 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार के बाद वे कपकोट से विधायक चुने गए और उत्तराखंड विधानसभा के पहले नेता प्रतिपक्ष बने।
वर्ष 2007 में वे पुनः कपकोट से विधायक निर्वाचित हुए।
संसद से राजभवन तक का सफर
नवंबर 2008 में राज्यसभा सदस्य बने
2014 में नैनीताल-ऊधमसिंह नगर लोकसभा सीट से सांसद निर्वाचित
5 सितंबर 2019 को महाराष्ट्र के 22वें राज्यपाल नियुक्त हुए
कोश्यारी भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, उत्तराखंड के तीसरे प्रदेश अध्यक्ष और राज्य में पार्टी प्रमुख भी रहे। वे उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हैं जिन्हें विधानसभा के दोनों सदनों और संसद के दोनों सदनों में प्रतिनिधित्व का अवसर मिला। इसी कारण उन्हें ‘पहाड़ का योद्धा’ कहा जाता है।
‘राजभवन’ को ‘लोकभवन’ कहने का सुझाव
महाराष्ट्र के राज्यपाल रहते हुए 14 जून 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक कार्यक्रम में भगत सिंह कोश्यारी ने राज्यपाल आवासों को ‘राजभवन’ के स्थान पर ‘लोकभवन’ कहे जाने का सुझाव दिया था। बाद में केंद्र सरकार ने इस दिशा में निर्णय लिया।
पारिवारिक और शैक्षिक पृष्ठभूमि
भगत सिंह कोश्यारी का जन्म 17 जून 1942 को उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के पलनाधुरा चेताबगड़ गांव में हुआ।
वे 11 भाई-बहनों के परिवार में नौवें स्थान पर हैं। उनके पिता गोपाल सिंह कोश्यारी कृषक और माता मोतिमा देवी गृहिणी थीं।
1961-62 में अल्मोड़ा कॉलेज के छात्रसंघ महासचिव चुने गए
आगरा विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में एमए
उत्तर प्रदेश के एटा जिले के राजा इंटर कॉलेज में लेक्चरर के रूप में कॅरियर की शुरुआत
उत्तराखंड में कई शिक्षण संस्थानों की स्थापना
कुमाऊं विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद के प्रतिनिधि (1979–82, 1982–85, 1988–91)
1975 से पिथौरागढ़ से प्रकाशित साप्ताहिक ‘पर्वत पीयूष’ के संस्थापक व प्रबंध संपादक रहे।
भगत सिंह कोश्यारी को पद्म भूषण सम्मान मिलना केवल एक व्यक्ति का सम्मान नहीं, बल्कि उत्तराखंड राज्य आंदोलन, सादगी, संघर्ष और सार्वजनिक जीवन के मूल्यों का सम्मान है। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए ‘सादा जीवन, उच्च विचार’ की जीवंत मिसाल है।