भारतीय मूल की नासा अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने 27 साल की ऐतिहासिक सेवा के बाद नासा से सेवानिवृत्ति ले ली है। नासा ने मंगलवार 20 जनवरी को इसकी आधिकारिक घोषणा करते हुए बताया कि सुनीता विलियम्स का रिटायरमेंट 27 दिसंबर 2025 से प्रभावी हो गया है। अपने लंबे और चुनौतीपूर्ण करियर के दौरान उन्होंने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में कई उपलब्धियां हासिल कीं और भारत-अमेरिका दोनों देशों का नाम रोशन किया।
सुनीता विलियम्स नासा की सबसे अनुभवी और सम्मानित अंतरिक्ष यात्रियों में शामिल रहीं। उन्होंने तीन अंतरिक्ष मिशनों में कुल 608 दिन अंतरिक्ष में बिताए, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। उनके करियर को मानव अंतरिक्ष उड़ान के इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
साल 2024 में सुनीता विलियम्स अपने साथी अंतरिक्ष यात्री बुच विलमोर के साथ बोइंग के नए स्टारलाइनर क्रू कैप्सूल से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पहुंची थीं। यह मिशन शुरुआत में केवल एक हफ्ते के लिए निर्धारित था, लेकिन तकनीकी खामियों के चलते यह मिशन करीब नौ महीने तक लंबा खिंच गया। इस दौरान सुनीता विलियम्स ISS में फंसे रहने को लेकर सुर्खियों में भी रहीं। आखिरकार मार्च 2025 में दोनों अंतरिक्ष यात्री SpaceX के जरिए सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर लौटे।
सुनीता विलियम्स का करियर न सिर्फ साहस और समर्पण का प्रतीक रहा, बल्कि उन्होंने आने वाली पीढ़ियों के लिए अंतरिक्ष विज्ञान में आगे बढ़ने की प्रेरणा भी दी। उनकी सेवानिवृत्ति के साथ नासा के एक स्वर्णिम अध्याय का समापन माना जा रहा है।