दिलचस्प: तलाक लेते ही पति ने की दूसरी शादी, पत्नी ने जाहिर की फिर अपनाने की इच्छा, खटखटाया कोर्ट का दरवाजा

दिलचस्प: तलाक लेते ही पति ने की दूसरी शादी, पत्नी ने जाहिर की फिर अपनाने की इच्छा, खटखटाया कोर्ट का दरवाजा

गुजरात हाई कोर्ट में पत्नी ने पुनर्विवाह रद्द करने मांग की

अहमदाबाद: गुजरात में तलाक के तुरंत बाद किए गए पुनर्विवाह को लेकर एक मामला गुजरात हाई कोर्ट पहुंचा है। अहमदाबाद पारिवारिक न्यायालय ने 20 जनवरी 2025 को पति को तलाक की डिक्री प्रदान की थी। इसके ठीक सात दिन बाद, 27 जनवरी को पति ने दूसरी शादी कर ली।

पूर्व पत्नी ने इस पुनर्विवाह को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में अपील दायर की है और कहा है कि यह विवाह हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 15 का उल्लंघन है। अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए पति को 18 फरवरी को तलब किया है।

क्या है मामला?

अहमदाबाद पारिवारिक न्यायालय ने 20 जनवरी 2025 को पति की ओर से दायर तलाक याचिका को मंजूरी दे दी थी। इसके बाद दोनों का विधिवत तलाक हो गया। हालांकि, पति ने 27 जनवरी 2025 को दूसरी शादी कर ली।

इस पर पत्नी ने गुजरात हाई कोर्ट में याचिका दायर कर पति के पुनर्विवाह को निरस्त (रद्द) करने की मांग की है। साथ ही, उसने इच्छा जताई है कि वह अपने पति के साथ पुनः वैवाहिक जीवन शुरू करना चाहती है।

पत्नी का तर्क: 90 दिन की वैधानिक अवधि का उल्लंघन

पत्नी का कहना है कि तलाक के आदेश के बाद अपील दायर करने के लिए 90 दिनों की वैधानिक अवधि उपलब्ध होती है। इस अवधि के भीतर पुनर्विवाह करना कानून की भावना के विपरीत है।

हाई कोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई में टिप्पणी की कि तलाक के तुरंत बाद पुनर्विवाह करना ‘जल्दबाजी’ प्रतीत होता है और यदि यह धारा 15 के प्रावधानों के विरुद्ध पाया गया तो पारिवारिक न्यायालय के आदेश पर रोक लगाई जा सकती है।

पत्नी पर पति के आरोप

पत्नी ने दावा किया कि पति ने केवल वर्तमान कार्यवाही को रद्द करने और धारा 15 के प्रावधान की अवहेलना करने के उद्देश्य से पुनर्विवाह किया है। अपील का विरोध करते हुए, पुलिस कॉन्स्टेबल पति ने कहा कि पारिवारिक न्यायालय ने उसे क्रूरता और परित्याग के आधार पर तलाक दिया था। उसने दावा किया कि क्रूरता साबित हो गई क्योंकि पत्नी कथित तौर पर टेलीविजन देखने में मग्न रहती थी और उसे नजरअंदाज करती थी, और बाद में वैवाहिक घर छोड़कर चली गई।

हाई कोर्ट की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट की पीठ ने पत्नी से पूछा कि क्या वह अब भी पति के साथ वैवाहिक जीवन शुरू करने के लिए तैयार है। पत्नी ने सकारात्मक जवाब दिया। उसके वकील ने बताया कि मध्यस्थता के प्रयास किए गए थे, लेकिन पति ने समझौते या भरण-पोषण पर सहमति नहीं दी।

प्रारंभिक सुनवाई में हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि तलाक के मात्र सात दिन बाद पुनर्विवाह करना जल्दबाजी प्रतीत होता है और यह धारा 15 के प्रावधानों के विपरीत हो सकता है।

अदालत ने पति को 18 फरवरी को तलब किया है और पूछा है कि उसने 27 जनवरी 2025 को पुनर्विवाह किस आधार पर किया। अदालत ने संकेत दिया है कि यदि पुनर्विवाह का औचित्य स्पष्ट नहीं किया गया, तो पारिवारिक न्यायालय के तलाक आदेश पर रोक लगाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

कानूनी विश्लेषण: हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 15 क्या कहती है?

पुनर्विवाह हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 15 क्या है?

हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 15 के अनुसार, जब किसी दंपत्ति को अदालत द्वारा तलाक की डिक्री दे दी जाती है, तो दोनों पक्ष पुनर्विवाह कर सकते हैं, बशर्ते कि तलाक के खिलाफ अपील की अवधि समाप्त हो चुकी हो या यदि अपील दायर की गई हो तो उसे खारिज कर दिया गया हो। सरल शब्दों में, जब तक अपील करने का वैधानिक समय (आमतौर पर 90 दिन) पूरा न हो जाए या अपील का निपटारा न हो जाए, तब तक पुनर्विवाह कानूनी जोखिम में हो सकता है।

क्या 90 दिन से पहले किया गया विवाह स्वतः अवैध है?

यह एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न है। न्यायालयों की विभिन्न व्याख्याओं के अनुसार, यदि तलाक की डिक्री के खिलाफ अपील की संभावना बनी हुई है, तो जल्दबाजी में किया गया पुनर्विवाह बाद में विवाद का कारण बन सकता है।

हालांकि, कुछ मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि तलाक की डिक्री प्रभावी है और उस पर कोई स्थगन (Stay) आदेश नहीं है, तो पुनर्विवाह स्वतः शून्य (Void) नहीं माना जाएगा।

इस मामले में अदालत को यह तय करना होगा कि क्या पुनर्विवाह अपील की अवधि के दौरान विधिसम्मत था या नहीं।