टैक्स चोरी पर आयकर विभाग सख्त: 63 हजार रेस्टोरेंट निगरानी में, 31 मार्च 2026 तक गलती सुधारने का मौका

टैक्स चोरी पर आयकर विभाग सख्त: 63 हजार रेस्टोरेंट निगरानी में, 31 मार्च 2026 तक गलती सुधारने का मौका

नई दिल्ली। आयकर विभाग ने देशभर के रेस्टोरेंट सेक्टर में संभावित टैक्स चोरी के मामलों को लेकर बड़ी कार्रवाई शुरू की है। विभाग की जांच में टर्नओवर छिपाने की आशंका के चलते लगभग 63,000 रेस्टोरेंट्स को निगरानी सूची में रखा गया है। डेटा आधारित विश्लेषण के बाद विभाग ने SAKSHAM NUDGE नाम से एक विशेष अभियान शुरू किया है, जिसके तहत रेस्टोरेंट संचालकों को ई-मेल और संदेश भेजकर अपनी आय से जुड़ी त्रुटियां स्वेच्छा से सुधारने का अवसर दिया जा रहा है।

आयकर विभाग के अनुसार हाल ही में 22 राज्यों में स्थित 62 रेस्टोरेंट आउटलेट्स पर विस्तृत जांच की गई थी। इस जांच में करीब 408 करोड़ रुपये की बिक्री छिपाने का मामला सामने आया। अधिकारियों ने पाया कि कई प्रतिष्ठान बिल डिलीट करने, नकद लेन-देन को दर्ज न करने और बिलिंग सॉफ्टवेयर में मौजूद ‘डिलीट’ विकल्प का दुरुपयोग कर कर चोरी कर रहे थे।

कहां से शुरू हुई कार्रवाई?

यह जांच मूल रूप से हैदराबाद में एक बिरयानी रेस्टोरेंट की नियमित जांच से शुरू हुई थी। शुरुआती जांच में मिले संकेतों के बाद आयकर विभाग ने पूरे देश में इस तरह की गतिविधियों की पड़ताल शुरू कर दी। मामले को संभालने के लिए विभाग ने ‘ट्रस्ट-फर्स्ट’ नीति अपनाई है। इसी के तहत SAKSHAM NUDGE अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें ‘S’ का अर्थ संकलन, ‘A’ अनुसंधान और ‘K’ क्रियान्वयन सहित कई चरण शामिल हैं। अभियान के पहले चरण में करीब 63,000 रेस्टोरेंट संचालकों को सूचनात्मक संदेश भेजे जा रहे हैं।

गलती सुधारने पर सख्त कार्रवाई से राहत

आयकर विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि रेस्टोरेंट मालिक स्वेच्छा से अपनी आय से जुड़ी त्रुटियों को सुधार लेते हैं और आयकर अधिनियम की धारा 139(8A) के तहत अपडेटेड रिटर्न दाखिल कर देते हैं, तो कड़ी कार्रवाई से बचा जा सकता है। इसके लिए 31 मार्च 2026 की अंतिम तिथि निर्धारित की गई है।

विभाग ने यह भी कहा है कि यह अभियान दंडात्मक कार्रवाई के बजाय सहयोगात्मक पहल के रूप में चलाया जा रहा है। इससे पहले चलाए गए NUDGE अभियानों के दौरान बड़ी संख्या में करदाताओं ने स्वेच्छा से अपने रिटर्न में सुधार किया था, जिसके परिणामस्वरूप 8,800 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त टैक्स सरकार को प्राप्त हुआ।

AI और डेटा एनालिटिक्स से बढ़ी निगरानी

आयकर विभाग ने करदाताओं से अपील की है कि वे इस अवसर का उपयोग करते हुए पारदर्शी तरीके से टैक्स नियमों का पालन करें। अधिकारियों के मुताबिक आधुनिक डेटा एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित टूल्स के इस्तेमाल से अब कर चोरी की पहचान करना पहले की तुलना में आसान हो गया है।

हालांकि विभाग का कहना है कि प्राथमिकता पहले करदाताओं को सुधार का मौका देना है। यदि कोई रेस्टोरेंट संचालक विभाग के संदेशों को नजरअंदाज करता है, तो आगे जांच और सख्त कार्रवाई की जा सकती है। यह पहल सरकार की ‘ट्रस्ट लेकिन वेरिफाई’ नीति का हिस्सा मानी जा रही है, जिसका उद्देश्य टैक्स सिस्टम में पारदर्शिता और स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा देना है।