चेतावनी: एडटेक कंपनियों की फ्रेंचाइजी के जरिए डिग्री को मान्यता नहीं, 32 फर्जी विश्वविद्यालय चिन्हित

चेतावनी: एडटेक कंपनियों की फ्रेंचाइजी के जरिए डिग्री को मान्यता नहीं, 32 फर्जी विश्वविद्यालय चिन्हित

नई दिल्ली, 5 अगस्त। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने छात्रों और अभिभावकों को आगाह किया है कि कुछ एडटेक कंपनियां यूजीसी से मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों के नाम का उपयोग कर ऑनलाइन और ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग (ओडीएल) माध्यम से डिग्री व डिप्लोमा कार्यक्रमों का प्रचार कर रही हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस प्रकार की फ्रेंचाइजी व्यवस्था यूजीसी के नियमों के अनुरूप नहीं है और ऐसे कार्यक्रमों को मान्यता प्राप्त नहीं माना जाएगा।

यूजीसी ने कहा है कि यदि कोई एडटेक कंपनी या उच्च शिक्षण संस्थान (एचईआई) इस तरह की अनधिकृत व्यवस्था में शामिल पाया जाता है तो उसके खिलाफ लागू कानूनों और नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। आयोग ने छात्रों और अन्य हितधारकों को सलाह दी है कि किसी भी पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने से पहले यूजीसी के डिस्टेंस एजुकेशन ब्यूरो (डीईबी) की वेबसाइट पर संबंधित कार्यक्रम की मान्यता और अधिकृत स्थिति अवश्य जांच लें।

फरवरी 2026 तक 32 फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची

यूजीसी के अनुसार, जब किसी संस्था के विरुद्ध बिना अधिकार डिग्री कार्यक्रम संचालित करने की शिकायत मिलती है, तो पहले उसे नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा जाता है। यदि संस्था का जवाब संतोषजनक नहीं होता, तो उसे फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची में शामिल किया जाता है। फरवरी 2026 में जारी नवीनतम सूची के अनुसार देशभर में 32 संस्थानों को फर्जी विश्वविद्यालय घोषित किया गया है। यह सूची यूजीसी की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।

1996 से सक्रिय है एंटी-माल-प्रैक्टिस सेल

फर्जी विश्वविद्यालयों और अनधिकृत संस्थानों पर निगरानी रखने के लिए यूजीसी ने 30 मई 1996 को एंटी-माल-प्रैक्टिस सेल (एएमपीसी) का गठन किया था। यह प्रकोष्ठ उन संस्थानों के मामलों की जांच करता है जो यूजीसी अधिनियम, 1956 के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए डिग्री प्रदान करने या शैक्षणिक कार्यक्रम संचालित करने का दावा करते हैं।

जागरूकता बढ़ाने के लिए उठाए गए कदम

यूजीसी ने बताया कि फर्जी संस्थानों पर अंकुश लगाने और छात्रों को जागरूक करने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। इनमें अनधिकृत संस्थानों को कारण बताओ और चेतावनी नोटिस जारी करना, राज्यवार फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची समय-समय पर वेबसाइट पर प्रकाशित करना तथा सोशल मीडिया और सार्वजनिक सूचनाओं के माध्यम से छात्रों, अभिभावकों और आम लोगों को जागरूक करना शामिल है।

इसके अलावा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से भी अनुरोध किया गया है कि वे अपने क्षेत्र में संचालित फर्जी विश्वविद्यालयों और संस्थानों के विरुद्ध आवश्यक कानूनी कार्रवाई करें तथा जरूरत पड़ने पर एफआईआर दर्ज कराएं।

यह जानकारी शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी