नई दिल्ली: पनीर के नाम पर गैर-दूध से बने उत्पादों की बिक्री को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने बड़ा कदम उठाया है। FSSAI ने ऐसे एनालॉग उत्पादों को ‘पनीर’ के नाम से बनाने और बेचने पर रोक लगाने के लिए नियमों में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, यह अभी ड्राफ्ट प्रस्ताव है और अंतिम नियम लागू नहीं हुआ है।
‘पनीर’ नाम और लेबल पर भी रोक का प्रस्ताव
FSSAI के प्रस्तावित संशोधन के तहत ‘Analogue in Dairy Context’ श्रेणी में लाइसेंस या पंजीकृत उत्पादों के नाम, लेबल और मार्केटिंग में ‘पनीर’ शब्द का इस्तेमाल बंद करना होगा। प्रस्ताव का उद्देश्य ऐसे उत्पादों को वास्तविक दूध से बने पनीर के रूप में पेश किए जाने से रोकना है।
FSSAI के मुताबिक, इससे उपभोक्ताओं को उत्पाद की वास्तविक प्रकृति और उसमें इस्तेमाल सामग्री के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी और उन्हें गुमराह होने से बचाया जा सकेगा।
क्या होता है एनालॉग पनीर?
एनालॉग डेयरी उत्पाद ऐसे उत्पाद होते हैं जिनमें दूध से प्राप्त घटकों के बजाय दूसरे घटकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। रिपोर्टों के अनुसार इनमें वनस्पति तेल, स्टार्च, इमल्सीफायर और अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है, जबकि पारंपरिक पनीर दूध से बनाया जाता है।
अभी लागू नहीं हुआ है नया नियम
FSSAI की ओर से जारी प्रस्ताव पर आम लोगों और संबंधित पक्षों से आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं। आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना उपलब्ध होने के बाद 60 दिन की अवधि पूरी होने पर प्रस्ताव पर आगे विचार किया जाएगा। इसलिए फिलहाल इसे अंतिम प्रतिबंध नहीं माना जा सकता।
FSSAI ने इससे पहले अप्रैल 2026 में भी चीज एनालॉग की लेबलिंग को लेकर कार्रवाई की थी। महाराष्ट्र में जारी निर्देशों के तहत रेस्तरां, होटल और अन्य फूड सर्विस प्रतिष्ठानों को एनालॉग उत्पादों के इस्तेमाल की स्पष्ट जानकारी देने को कहा गया था।