देहरादून: बदरीनाथ धाम से देहरादून लौटते समय जोशीमठ क्षेत्र में हुए हेलीकॉप्टर हादसे में पायलट समेत छह लोगों की मौत के बाद उत्तराखंड में हेली सेवाओं की सुरक्षा व्यवस्था सख्त की जा रही है। उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) की 31 अक्टूबर को हुई उच्चस्तरीय बैठक में दो अहम फैसले लिए गए हैं। अब किसी भी चार्टर हेलीकॉप्टर में पायलट के साथ को-पायलट की तैनाती अनिवार्य होगी। इसके अलावा प्रत्येक उड़ान के बाद पायलट को अपनी रिपोर्ट UCADA को भेजनी होगी। ये दोनों व्यवस्थाएं 2 नवंबर 2026 से लागू होंगी।
चार्टर हेलीकॉप्टर में को-पायलट अनिवार्य
बैठक में चारधाम हेली सेवाओं की सुरक्षा, मौसम संबंधी चेतावनियों के बावजूद उड़ान की अनुमति, ऑपरेटरों की जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था पर चर्चा की गई। हादसे के बाद सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा करते हुए चार्टर हेलीकॉप्टरों में को-पायलट की अनिवार्य तैनाती का निर्णय लिया गया है। साथ ही प्रत्येक उड़ान के बाद पायलट की रिपोर्ट जमा कराना भी जरूरी होगा।
30 अक्टूबर को जोशीमठ के पास हुआ था हादसा
ट्रांस भारत एविएशन का हेलीकॉप्टर 30 अक्टूबर को दोपहर करीब 1:12 बजे बदरीनाथ सिविल हेलीपैड से देहरादून के सहस्त्रधारा हेलीपैड के लिए रवाना हुआ था। जोशीमठ घाटी के पास दोपहर करीब 1:14 बजे हेलीकॉप्टर का रडार ट्रांसमिशन और रेडियो संपर्क टूट गया।
इसके बाद चाई गांव के पास हाथी पर्वत क्षेत्र में हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में पायलट हिमांशु सभरवाल और कर्नाटक से आए पांच श्रद्धालुओं की मौत हो गई। सेना, एसडीआरएफ, आईटीबीपी और स्थानीय पुलिस की टीमों ने दुर्गम जंगल क्षेत्र में रेस्क्यू अभियान चलाकर शव बरामद किए।
ट्रांस भारत एविएशन के पूरे बेड़े की उड़ान पर रोक
हादसे के बाद UCADA ने एहतियातन ट्रांस भारत एविएशन के पूरे हेलीकॉप्टर बेड़े की उड़ानों पर रोक लगा दी है। वहीं, दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) और डीजीसीए की टीम ने 31 अक्टूबर को घटनास्थल का निरीक्षण किया। जांच टीम ने दुर्घटनास्थल से साक्ष्य और जरूरी जानकारियां जुटाईं तथा ब्लैक बॉक्स की तलाश भी की।
जांच पूरी होने के बाद टीम अपनी रिपोर्ट डीजीसीए को सौंपेगी। इसके बाद ही हादसे के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा। फिलहाल मौसम की स्थिति, उड़ान संचालन और सुरक्षा मानकों से जुड़े पहलुओं की जांच की जा रही है।