नगर निगम देहरादून की बड़ी पहल: धोरन डंप साइट अब बनी वैज्ञानिक मेकेनाइज़्ड ट्रांसफर स्टेशन

नगर निगम देहरादून की बड़ी पहल: धोरन डंप साइट अब बनी वैज्ञानिक मेकेनाइज़्ड ट्रांसफर स्टेशन

देहरादून, 12 फरवरी 2026।
नगर निगम देहरादून ने शहर में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को आधुनिक और वैज्ञानिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए धोरन क्षेत्र में स्थापित मेकेनाइज़्ड ट्रांसफर स्टेशन (MTS) का सफल ट्रायल रन किया। पहले जहां इस स्थान पर पारंपरिक तरीके से कचरा डंप किया जाता था, वहीं अब इसे पूर्णतः विकसित कर आधुनिक वैज्ञानिक वेस्ट ट्रांसफर स्टेशन में बदल दिया गया है।
नगर निगम के अनुसार, MTS का निर्माण कार्य जनवरी 2025 में शुरू हुआ था और लगभग एक वर्ष में इसे तैयार कर संचालन योग्य बना लिया गया। अब यहां कचरे को जमीन पर डंप किए बिना सीधे कम्प्रेस्ड कैप्सूल में भरकर शीशमबाड़ा प्रोसेसिंग प्लांट भेजा जाएगा।


‘नो ग्राउंड डंपिंग’ मॉडल पर आधारित नई व्यवस्था
नई प्रणाली को “No Ground Dumping – Direct Mechanical Transfer” मॉडल पर डिजाइन किया गया है।
कचरा सीधे Receiving Hopper में डाला जाएगा।
दो हाई-प्रेशर Static Compaction Machines कचरे को कम्प्रेस करेंगी।
कम्प्रेस्ड कचरे को सीधे सीलबंद कैप्सूल/कंटेनर में भरा जाएगा।
Hook Loader वाहनों के माध्यम से इन्हें शीशमबाड़ा प्लांट तक पहुंचाया जाएगा।
इस पूरी प्रक्रिया में ओपन डंपिंग और मैनुअल हैंडलिंग को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।


कैसे काम करेगी नई MTS प्रणाली?
डोर-टू-डोर कलेक्शन वाहन संबंधित वार्डों से कचरा लेकर सीधे MTS पहुंचेंगे।
जमीन पर कचरा गिराने की व्यवस्था समाप्त — वाहन सीधे हॉप्पर में डिस्चार्ज करेंगे।
हाई-प्रेशर कम्पेक्शन से कचरे का वॉल्यूम कम किया जाएगा।
सीलबंद कंटेनरों में ट्रांसफर — दुर्गंध और लीचेट पर नियंत्रण।
Hook Loader के माध्यम से शीशमबाड़ा प्रोसेसिंग प्लांट तक सुरक्षित परिवहन।

शहर को मिलेंगे ये प्रमुख लाभ
ओपन डंपिंग पूर्णतः समाप्त
दुर्गंध और प्रदूषण पर नियंत्रण
लीचेट में कमी — पर्यावरण संरक्षण
कम ट्रिप में अधिक कचरे का परिवहन
संचालन लागत व समय में बचत
स्वच्छ सर्वेक्षण मानकों के अनुरूप प्रणाली

नगर निगम देहरादून ने इसे शहर में Integrated & Scientific Solid Waste Management की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया है। अधिकारियों के अनुसार, इस आधुनिक व्यवस्था से भविष्य में स्रोत पर कचरा पृथक्करण और प्रोसेसिंग क्षमता को और अधिक सुदृढ़ किया जा सकेगा।