सोलर स्पाइडर ग्रुप द्वारा म्यूल अकाउंट और क्रिप्टोकरेंसी के जरिये लेन-देन की योजना
नोएडा, 14 मार्च 2026। गौतमबुद्धनगर पुलिस ने एक अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क का खुलासा करते हुए करोड़ों रुपये की संभावित बैंकिंग धोखाधड़ी को समय रहते रोक दिया है। पुलिस के अनुसार यह गिरोह भारत में सक्रिय होकर बैंकिंग सिस्टम की तकनीकी कमजोरियों का फायदा उठाते हुए करीब 60 से 80 करोड़ रुपये की रकम ट्रांसफर करने की योजना बना रहा था। हालांकि साइबर क्राइम टीम ने समय पर कार्रवाई करते हुए दो विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार कर लिया।
अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड मॉड्यूल का खुलासा
गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट (Gautam Buddh Nagar Police Commissionerate) की साइबर क्राइम यूनिट को सूचना मिली थी कि एक संगठित साइबर फ्रॉड मॉड्यूल भारत में सक्रिय है और बैंकिंग सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाकर बड़े पैमाने पर ठगी की तैयारी कर रहा है। सूचना मिलते ही थाना साइबर क्राइम, थाना नॉलेज पार्क और मेरठ जोन की साइबर कमांडो टीम को अलर्ट कर दिया गया। इसके बाद कई दिनों तक तकनीकी निगरानी, डिजिटल ट्रैकिंग और संदिग्ध गतिविधियों की गहन जांच की गई।
Solar Spider ग्रुप से जुड़े आरोपी
डीसीपी साइबर क्राइम (Deputy Commissioner of Police – Cyber Crime) शैव्या गोयल के अनुसार गिरफ्तार किए गए आरोपी अंतरराष्ट्रीय साइबर थ्रेट ग्रुप Solar Spider से जुड़े हुए हैं। यह समूह पहले भी कई देशों में साइबर हमलों और वित्तीय धोखाधड़ी की घटनाओं में सक्रिय रहा है। जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह भारत में बैठकर बैंकिंग सिस्टम की कमजोरियों की पहचान कर रहा था और विशेष रूप से कुछ सहकारी बैंकों (Co-operative Banks) को निशाना बना रहा था।
वीकेंड पर ट्रांजेक्शन कर रहे थे आरोपी
पुलिस जांच में पता चला कि आरोपियों ने अपनी योजना बेहद सोच-समझकर बनाई थी। वे अधिकतर ट्रांजेक्शन सप्ताहांत यानी शनिवार और रविवार को करते थे। इन दिनों कई बैंक बंद रहते हैं या उनकी निगरानी सीमित होती है, जिससे धोखाधड़ी का पता तुरंत नहीं चल पाता। इसी रणनीति के तहत 7 से 8 मार्च के बीच गुजरात के एक सहकारी बैंक को निशाना बनाकर लगभग 7 करोड़ रुपये की ठगी की गई।
म्यूल अकाउंट्स के जरिए रकम घुमाने की तैयारी
जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह का असली लक्ष्य सिर्फ एक बैंक तक सीमित नहीं था। आरोपी अलग-अलग बैंक खातों से 60 से 80 करोड़ रुपये तक की रकम निकालकर विभिन्न म्यूल अकाउंट्स (Mule Accounts) में ट्रांसफर करने की योजना बना रहे थे। म्यूल अकाउंट्स ऐसे बैंक खाते होते हैं जिनका इस्तेमाल अवैध धन को इधर-उधर ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है। इन खातों के जरिए रकम को कई स्तरों में भेजा जाता है, जिससे धन के वास्तविक स्रोत तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
क्रिप्टोकरेंसी में बदलने की थी योजना
जांच एजेंसियों के मुताबिक, म्यूल अकाउंट्स में पैसा पहुंचाने के बाद उसे क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) में बदलने की योजना थी। इसके बाद यह रकम विदेशी डिजिटल वॉलेट्स में ट्रांसफर की जानी थी, जिससे धन के ट्रैक होने की संभावना काफी कम हो जाती। प्रारंभिक जांच में इस नेटवर्क के तार नाइजीरिया और दक्षिण अफ्रीका में सक्रिय साइबर अपराध गिरोहों से जुड़े होने की आशंका भी जताई गई है।
डिजिटल निगरानी से पुलिस को मिली सफलता
जैसे ही इस बड़े साइबर फ्रॉड प्लान की जानकारी पुलिस को मिली, तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी गई। साइबर क्राइम टीम ने संदिग्ध डिजिटल ट्रांजेक्शंस, आईपी एड्रेस (Internet Protocol Address – IP Address) और बैंक खातों की निगरानी शुरू कर दी। साथ ही इंडियन साइबर क्राइम को-ऑर्डिनेशन सेंटर (Indian Cyber Crime Coordination Centre – I4C) और संबंधित बैंकों को भी सतर्क किया गया, जिससे संभावित ठगी को समय रहते रोक लिया गया।
दो विदेशी आरोपी गिरफ्तार
लगातार तकनीकी जांच के बाद पुलिस को मॉड्यूल से जुड़े कुछ संदिग्धों की जानकारी मिली। इसके बाद नोएडा में विशेष अभियान चलाकर दो विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों के पास से कई डिजिटल डिवाइस और महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बरामद हुए हैं, जिनकी फोरेंसिक जांच की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि इन उपकरणों से पूरे अंतरराष्ट्रीय साइबर नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।
बैंकों को जारी की गई एडवाइजरी
फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस साइबर ठगी नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं और इसका विस्तार किन देशों तक है। साइबर विशेषज्ञ और जांच एजेंसियां डिजिटल ट्रेल, क्रिप्टो वॉलेट्स और अंतरराष्ट्रीय ट्रांजेक्शंस की जांच कर रही हैं।
इस मामले के सामने आने के बाद गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट ने सभी सहकारी बैंकों को एडवाइजरी जारी की है। बैंकों को अपनी साइबर सुरक्षा मजबूत करने, नियमित सिस्टम ऑडिट कराने और सुरक्षा खामियों की समीक्षा करने की सलाह दी गई है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
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