गूगल-माइक्रोसॉफ्ट समेत बड़ी टेक कंपनियां ईरान की ‘हिट लिस्ट’ में, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले की आशंका

गूगल-माइक्रोसॉफ्ट समेत बड़ी टेक कंपनियां ईरान की ‘हिट लिस्ट’ में, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले की आशंका

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट (Middle East) में पिछले कुछ समय से जारी तनाव अब एक नए और चिंताजनक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। यह संघर्ष अब केवल मिसाइल, टैंक और सैन्य हथियारों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आधुनिक तकनीक और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर (Digital Infrastructure) भी संभावित निशाने पर आ गया है।

ईरान से संबद्ध मीडिया नेटवर्क तस्नीम न्यूज (Tasnim News) की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कुछ अमेरिकी टेक कंपनियों के दफ्तरों और तकनीकी ढांचे को संभावित लक्ष्य के रूप में चिन्हित किया गया है। जारी सूची में गूगल (Google), माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft), अमेजन (Amazon), एनवीडिया (NVIDIA), आईबीएम – इंटरनेशनल बिजनेस मशीन (IBM – International Business Machines), ऑरेकल (Oracle) और पैलेंटिर टेक्नोलॉजीज (Palantir Technologies) जैसी प्रमुख कंपनियों के नाम बताए गए हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान का आरोप है कि ये कंपनियां अमेरिकी और इजरायली रक्षा तकनीक (Military Technology) से जुड़े विभिन्न प्रोजेक्ट्स में सहयोग करती हैं। इसी वजह से युद्ध जैसी स्थिति में इन्हें वैध लक्ष्य (Legitimate Target) के रूप में देखा जा सकता है।

मिडिल ईस्ट क्षेत्र में मौजूद इन कंपनियों के कई महत्वपूर्ण कार्यालय और डेटा सेंटर (Data Centers) भी चर्चा में आ गए हैं। उदाहरण के तौर पर गूगल के कार्यालय दुबई और कतर में हैं, जबकि माइक्रोसॉफ्ट का क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर (Cloud Infrastructure) और क्षेत्रीय मुख्यालय भी इसी इलाके से संचालित होता है। वहीं अमेजन वेब सर्विसेज (Amazon Web Services – AWS) के कई बड़े क्लाउड डेटा सेंटर संयुक्त अरब अमीरात (United Arab Emirates – UAE) और बहरीन में स्थित हैं।

इस संघर्ष में पहली बार डिजिटल दुनिया के अहम ढांचे को सीधे निशाना बनाए जाने की आशंका जताई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1 मार्च 2026 को हुए ईरानी ड्रोन हमलों में अमेजन वेब सर्विसेज के कुछ डेटा सेंटर प्रभावित हुए थे। इन हमलों के चलते यूएई और बहरीन में मौजूद क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचने की बात कही गई, जिसके कारण कई ऑनलाइन सेवाओं में व्यवधान देखा गया।

बताया जा रहा है कि इन घटनाओं के बाद क्लाउड सेवाओं जैसे डेटा स्टोरेज (Data Storage), डेटाबेस (Database) और कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म (Computing Platform) में तकनीकी दिक्कतें सामने आईं। इसके चलते कई कंपनियों और संस्थानों की डिजिटल सेवाएं प्रभावित हुईं। यहां तक कि बैंकिंग और स्वास्थ्य सेवाओं (Banking and Health Services) से जुड़ी कुछ ऑनलाइन प्रणालियों पर भी असर पड़ा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति पारंपरिक युद्ध से अलग एक नई रणनीति की ओर इशारा करती है। अब संघर्ष केवल सैन्य बलों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आर्थिक और तकनीकी ढांचे को निशाना बनाकर भी प्रतिद्वंद्वी देश को कमजोर करने की कोशिश की जा सकती है।

इसी बीच ईरान की ओर से नागरिकों को यह सलाह भी दी गई है कि वे बैंक और बड़ी तकनीकी कंपनियों के कार्यालयों के आसपास अनावश्यक रूप से न जाएं। चेतावनी के पीछे यह आशंका जताई जा रही है कि भविष्य में ऐसे स्थान संभावित हमलों का लक्ष्य बन सकते हैं।

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव पहले ही वैश्विक ऊर्जा बाजार (Global Energy Market) और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि टेक कंपनियों के डेटा सेंटर और डिजिटल नेटवर्क पर हमले बढ़ते हैं, तो इसका असर केवल क्षेत्रीय स्तर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक इंटरनेट और क्लाउड सेवाओं (Cloud Services) पर भी व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।