देहरादून/नई दिल्ली। उत्तराखंड के ऋषिकेश से संचालित सर्वोत्तम एग्रो कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड के खिलाफ केंद्र सरकार ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। जनता के लाखों रुपये वापस न करने और नियमों के उल्लंघन के आरोपों के बीच केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय ने सोसाइटी को स्थायी रूप से बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
केंद्रीय सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार (CRCS) की ओर से जारी सार्वजनिक नोटिस के अनुसार, सोसाइटी न तो अपने पंजीकृत पते पर संचालित होती मिली और न ही उसने अपने वित्तीय और प्रशासनिक कामकाज का आवश्यक रिकॉर्ड सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया।
मामले की शुरुआत मार्च 2023 में हुई थी, जब सोसाइटी पर करीब 75 लाख रुपये की राशि वापस न करने संबंधी शिकायतें सामने आईं। शिकायतों के बाद उत्तराखंड स्तर पर जांच शुरू की गई। इसके बाद जुलाई 2024 में केंद्रीय रजिस्ट्रार कार्यालय ने कारण बताओ नोटिस जारी किया, लेकिन नोटिस पंजीकृत पते पर नहीं पहुंच सका और वापस लौट आया।
आगे की जांच के लिए उत्तराखंड सहकारिता विभाग को फिजिकल वेरिफिकेशन के निर्देश दिए गए। नवंबर 2025 में आई जांच रिपोर्ट में सामने आया कि ऋषिकेश के गुमानीवाला स्थित पंजीकृत पते पर सोसाइटी का कोई संचालन नहीं हो रहा था। साथ ही वार्षिक रिटर्न भी निर्धारित पोर्टल पर जमा नहीं किए गए थे।
फरार हो गए कंपनी के घपलेबाज अफसर: बताया जा रहा है कि आम जनता की गाढ़ी कमाई पर मोटा मुनाफा देने के लालच में RD और FD के नाम पर फाइनेंशियल फ्रॉड करने वाले इस गिरोह के कार्यालय देहरादून के कैंट, पटेल नगर और ऋषिकेश जैसे स्थानों पर संचालित किए जा रहे थे। फिलहाल ये कार्यालय बंद हैं। इस मामले में एक के बाद एक शिकायत सामने आने के बाद करोड़ों रुपए का गबन कर कंपनी के डायरेक्टर सहित कई लोग फरार हो गए हैं। सर्वोत्तम एग्रो कोऑपरेटिव सोसाइटी के अफसरों की STF तलाश कर रही है।
वित्तीय अनियमितताओं और वैधानिक प्रावधानों के उल्लंघन को देखते हुए अब केंद्र सरकार ने सोसाइटी को बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। नोटिस जारी होने के 15 दिनों के भीतर यदि कोई आपत्ति दर्ज नहीं होती है तो कानूनी प्रक्रिया पूरी कर संस्था का पंजीकरण समाप्त किया जा सकता है।
सरकार ने संकेत दिए हैं कि आगे पीड़ित निवेशकों के धन की रिकवरी को लेकर भी आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।