नई दिल्ली। देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं पर लगाम लगाने के लिए संसद ने लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पारित कर दिया है। बुधवार को लोकसभा से पारित होने के बाद गुरुवार को राज्यसभा ने भी इस विधेयक को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही अब परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ और अधिक कड़ी कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।
कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में विधेयक पेश किया। इस दौरान सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने विधेयक पर चर्चा के लिए सात घंटे का समय निर्धारित किया।
10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक जुर्माना
संशोधित कानून में पेपर लीक और अन्य अनुचित गतिविधियों में शामिल दोषियों के लिए सख्त दंड का प्रावधान किया गया है। इसके तहत दोषी पाए जाने पर 10 वर्ष तक की कैद, 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना और संपत्ति जब्त करने जैसी कार्रवाई की जा सकेगी।
फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी सुनवाई
विधेयक के अनुसार, मामलों के त्वरित निपटारे के लिए राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करेंगे। जांच एफआईआर दर्ज होने के दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी, जबकि आरोप पत्र दाखिल होने के बाद तीन महीने के भीतर सुनवाई पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।
युवाओं का भविष्य सरकार की प्राथमिकता
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि देश के युवा विकसित भारत की सबसे बड़ी पूंजी हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के बाद शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं और सरकार परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
विपक्ष ने जताई आपत्ति, किया वॉकआउट
विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि सरकार ने केवल दिखावटी बदलाव किए हैं और इससे पेपर लीक की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। उनका कहना था कि छात्रों के विरोध और लगातार उठ रहे सवालों के बाद सरकार यह संशोधन लेकर आई है।
वहीं भाजपा सांसद बृजलाल ने कहा कि यह संशोधन परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने और अनुचित साधनों पर रोक लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि मामलों की जांच के लिए विशेष कार्यबल (स्पेशल टास्क फोर्स) के गठन का भी प्रावधान किया गया है।