भारत के गांवों में इंटरनेट पहुंचाएगा Starlink: एलन मस्क

भारत के गांवों में इंटरनेट पहुंचाएगा Starlink: एलन मस्क

नई दिल्ली। दुनिया के चर्चित कारोबारी एलन मस्क एक बार फिर भारत के इंटरनेट बाजार में बड़ा कदम उठाने की तैयारी में हैं। मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा है कि उनकी सैटेलाइट इंटरनेट कंपनी Starlink भारत के उन लोगों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है, जहां अभी इंटरनेट कनेक्टिविटी सीमित है। खासतौर पर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में इसका बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।
मस्क का यह बयान ऐसे समय आया है जब Starlink भारत में अपनी सेवाएं शुरू करने के लिए सरकार से आवश्यक मंजूरियां हासिल करने की प्रक्रिया में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी ने अपने एडवांस Gen 2 सैटेलाइट सिस्टम और Direct-to-Device (D2D) तकनीक के लिए भी आवेदन किया है।

11 हजार से ज्यादा गांवों में 4G कनेक्टिविटी नहीं
मस्क की ओर से साझा आंकड़ों के मुताबिक, भारत के करीब 11,256 गांवों में अभी 4G नेटवर्क उपलब्ध नहीं है। वहीं ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच इंटरनेट कनेक्टिविटी में बड़ा अंतर है। शहरों में प्रति 100 लोगों पर इंटरनेट कनेक्शन की दर करीब 126.80 है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा 48.31 बताया गया है।
सरकार की भारतनेट परियोजना के जरिए देशभर में फाइबर नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है, लेकिन पहाड़ी, जंगल और दुर्गम क्षेत्रों में नेटवर्क पहुंचाना अब भी बड़ी चुनौती है।

बिना मोबाइल टावर के पहुंचेगा इंटरनेट
Starlink की खासियत यह है कि इसके लिए हर जगह मोबाइल टावर या जमीन पर फाइबर केबल बिछाने की जरूरत नहीं होती। कंपनी लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट्स के जरिए इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराती है।
वहीं Direct-to-Device तकनीक के जरिए भविष्य में सामान्य मोबाइल फोन को भी सीधे सैटेलाइट नेटवर्क से जोड़ने की संभावना है। इससे प्राकृतिक आपदा, बाढ़, भूकंप या नेटवर्क बाधित होने की स्थिति में कनेक्टिविटी बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

कीमत बनी बड़ी चुनौती
हालांकि ग्रामीण भारत में Starlink के सामने सबसे बड़ी चुनौती लागत हो सकती है। उपलब्ध रिपोर्टों में हार्डवेयर की अनुमानित कीमत करीब 33 हजार रुपये और मासिक सेवा शुल्क 3,000 से 4,200 रुपये तक होने की संभावना जताई गई है। भारत में सस्ता मोबाइल डेटा उपलब्ध होने के कारण ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए यह कीमत बड़ी चुनौती बन सकती है।

लाइसेंस और सुरक्षा मंजूरी का इंतजार
भारत में Starlink की सेवाएं शुरू करने के लिए कंपनी को जरूरी लाइसेंस, स्पेक्ट्रम और सुरक्षा संबंधी मंजूरियां हासिल करनी होंगी। रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि सुरक्षा और रणनीतिक चिंताओं के चलते मंजूरी प्रक्रिया में चुनौतियां सामने आई हैं।
अगर Starlink को भारत में आवश्यक मंजूरियां मिलती हैं, तो कंपनी खासतौर पर दूरदराज और नेटवर्क से वंचित क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी का नया विकल्प उपलब्ध करा सकती है।