देहरादून, 8 अक्टूबर। ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डेटा साइंस पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी शुरू हो गई। उद्घाटन सत्र में विशेषज्ञों ने कहा कि एआई मानव बुद्धिमत्ता की देन है और इसका भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि इसका उपयोग मानव विवेक, नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ किस तरह किया जाता है।
मानव बुद्धिमत्ता को सक्षम बनाए एआई
संगोष्ठी के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि आईआईटी रुड़की के प्रोफेसर डॉ. एस. एन. रंगनेकर ने कहा कि एआई का प्रभाव केवल उसकी तकनीकी क्षमता से तय नहीं होगा, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण है कि मनुष्य अपनी बुद्धिमत्ता और विवेक का इस्तेमाल करते हुए इसका किस दिशा में उपयोग करता है।
उन्होंने कहा कि मानव बुद्धि ही एआई की आधारशिला है। ऐसे में तकनीक की वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी, जब एआई मानव बुद्धिमत्ता का विकल्प बनने के बजाय उसकी क्षमताओं को और मजबूत करने का माध्यम बने।
एआई के साथ नैतिक जिम्मेदारी भी जरूरी
ग्राफिक एरा के प्रो-वाइस चांसलर डॉ. संतोष एस. सर्राफ ने कहा कि एआई केवल तकनीकी प्रगति का साधन नहीं है, बल्कि इसके साथ बड़ी सामाजिक जिम्मेदारी भी जुड़ी है। उन्होंने कहा कि एआई के विकास और उपयोग में मानव हित, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी को प्राथमिकता देना जरूरी है।
उन्होंने एआई आधारित तकनीकों के बढ़ते प्रभाव के बीच इनके जिम्मेदार और संतुलित उपयोग पर जोर दिया।
बिजनेस फोरकास्टिंग से लेकर डेटा साइंस की चुनौतियों पर चर्चा
तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान बिजनेस डिसीजन में एआई की भूमिका, डेटा साइंस और एआई से जुड़ी चुनौतियां एवं नैतिक मुद्दे तथा बिजनेस फोरकास्टिंग में एआई जैसे विषयों पर विशेषज्ञ विचार-विमर्श करेंगे।
संगोष्ठी का उद्देश्य एआई और डेटा साइंस के तेजी से बढ़ते प्रभाव, इनके व्यावहारिक उपयोग और उनसे जुड़े सामाजिक एवं नैतिक पहलुओं पर शिक्षाविदों और विशेषज्ञों के बीच संवाद को बढ़ावा देना है।
ग्राफिक एरा और एआईसीटीई का संयुक्त आयोजन
राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ मैनेजमेंट और एआईसीटीई, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है।
उद्घाटन अवसर पर कुलसचिव डॉ. नरेश कुमार शर्मा, स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के हेड डॉ. नवनीत रावत, डिपार्टमेंट ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट के हेड डॉ. एन. एस. बोहरा, कन्वीनर डॉ. गिरीश लखेड़ा और डॉ. रत्नाकर मिश्रा सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद रहे।
संगोष्ठी में एआई और डेटा साइंस के क्षेत्र में हो रहे बदलावों के साथ उनके व्यावसायिक, सामाजिक और नैतिक प्रभावों पर विशेषज्ञों के विचार साझा किए जाएंगे।