उपनल कर्मचारियों के समान वेतन पर फिर बदलाव की तैयारी, कट ऑफ डेट बदलने की कवायद तेज

उपनल कर्मचारियों के समान वेतन पर फिर बदलाव की तैयारी, कट ऑफ डेट बदलने की कवायद तेज

देहरादून: उत्तराखंड में उपनल कर्मचारियों को समान काम के बदले समान वेतन देने के फैसले को लेकर एक बार फिर नई चर्चा शुरू हो गई है। प्रदेश कैबिनेट के फैसले और शासनादेश जारी होने के बाद अब सरकार कट ऑफ डेट में दोबारा संशोधन करने की तैयारी कर रही है।

उपनल कर्मचारी लंबे समय से विनियमितीकरण और समान वेतन की मांग कर रहे हैं। इस मामले में वर्ष 2018 में हाईकोर्ट ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को राहत देने के निर्देश दिए थे। हालांकि सरकार इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट ले गई थी, जहां वर्ष 2024 में भी राज्य सरकार की याचिका खारिज हो गई।
इसके बाद सरकार ने कर्मचारियों के नियमितीकरण पर फैसला लेने के बजाय समान काम के बदले समान वेतन लागू करने का निर्णय लिया। पहले जारी आदेश में 25 नवंबर 2025 तक 10 वर्ष की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों को लाभ देने और 12 नवंबर 2018 को कट ऑफ डेट माना गया था।

बाद में शासन ने संशोधित आदेश जारी कर दो चरणों में लाभ देने की व्यवस्था तय की। इसमें 1 जनवरी 2016 से पहले और उसके बाद 12 नवंबर 2018 तक नियुक्त उपनल कर्मचारियों को अलग-अलग श्रेणियों में रखा गया। इस फैसले को लेकर कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ी और मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया।

इसी बीच अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान शासन स्तर पर फिर नई कवायद शुरू हुई है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में कट ऑफ डेट बदलने पर सहमति बनी है। अब सरकार 15 अक्टूबर 2024 यानी सुप्रीम कोर्ट के आदेश की तारीख को नई कट ऑफ डेट बनाने पर विचार कर रही है। इसके लिए सैनिक कल्याण विभाग जल्द कैबिनेट में प्रस्ताव ला सकता है।

उधर उपनल कर्मचारियों का कहना है कि हाईकोर्ट का मूल आदेश नियमितीकरण को लेकर था, इसलिए सरकार को समान वेतन के साथ कर्मचारियों के विनियमितीकरण पर भी स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए।