देहरादून में चार सप्ताह का कौशल विकास प्रशिक्षण शुरू, बीटेक छात्रों को सिखाई जाएंगी मृदा एवं जल संरक्षण की आधुनिक तकनीकें

देहरादून में चार सप्ताह का कौशल विकास प्रशिक्षण शुरू, बीटेक छात्रों को सिखाई जाएंगी मृदा एवं जल संरक्षण की आधुनिक तकनीकें

देहरादून। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान (IISWC), देहरादून में बुधवार से “जलागम प्रबंधन हेतु मृदा एवं जल संरक्षण” विषय पर चार सप्ताह का कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हो गया। यह प्रशिक्षण 1 जुलाई से 28 जुलाई 2026 तक आयोजित किया जाएगा, जिसका उद्देश्य बीटेक विद्यार्थियों को मृदा एवं जल संरक्षण, जलागम प्रबंधन और सतत प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में तकनीकी एवं व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करना है।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में देश के विभिन्न कृषि अभियांत्रिकी संस्थानों से आए 32 बीटेक विद्यार्थियों ने भाग लिया है, जिनमें 19 छात्र और 13 छात्राएं शामिल हैं। प्रतिभागी पंजाब, हरियाणा, आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश के प्रमुख कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालयों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान के जल विज्ञान एवं अभियांत्रिकी प्रभाग के अध्यक्ष एवं पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. अम्बरीश कुमार के स्वागत संबोधन के साथ हुआ। उन्होंने मृदा अपरदन, जल संकट, जलवायु परिवर्तन और सतत कृषि विकास जैसी चुनौतियों के समाधान में वैज्ञानिक जलागम प्रबंधन की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण में कक्षा व्याख्यान, प्रयोगशाला प्रदर्शन, क्षेत्रीय भ्रमण और व्यावहारिक सत्र शामिल किए गए हैं, जिससे विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकों का व्यवहारिक अनुभव मिलेगा।

उद्घाटन समारोह में महामाया कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, अकबरपुर के अध्यक्ष डॉ. अर्जुन पाल तथा चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संदीप भारद्वाज ऑनलाइन जुड़े। दोनों विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण का अधिकतम लाभ उठाने और सक्रिय सहभागिता के लिए प्रेरित किया।

वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. रमा पाल ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में मृदा एवं जल संरक्षण, जलागम नियोजन, जल विज्ञान, वर्षा जल संचयन, मृदा अपरदन नियंत्रण, जल संसाधन विकास, भू-स्थानिक तकनीकों और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन से जुड़ी आधुनिक तकनीकों का व्यापक प्रशिक्षण दिया जाएगा। संस्थान का उद्देश्य विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप व्यावहारिक एवं तकनीकी रूप से सक्षम बनाना है।