देहरादून। उत्तराखंड शासन ने विभिन्न विभागों में उपनल (उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम) के माध्यम से कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों के अनुबंध संबंधी मामलों के जल्द निस्तारण के लिए सभी विभागों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। शासन ने सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों, सचिवों, मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों, विभागाध्यक्षों और कार्यालयाध्यक्षों को एक सप्ताह के भीतर आवश्यक कार्रवाई पूरी कर रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा है।
सैनिक कल्याण अनुभाग के सचिव युगल किशोर पंत द्वारा जारी शासनादेश में कहा गया है कि यह कार्रवाई उत्तराखंड उच्च न्यायालय में कुन्दन सिंह बनाम उत्तराखंड राज्य व अन्य मामले में 12 नवंबर 2018 को पारित आदेश के अनुपालन में की जा रही है।
न्यूनतम वेतनमान और महंगाई भत्ते के लिए अनुबंध अनिवार्य
शासन ने स्पष्ट किया है कि उपनल के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों को उनके पद के अनुरूप न्यूनतम वेतनमान और महंगाई भत्ता उपलब्ध कराने के लिए संबंधित विभाग और कार्मिक के बीच अनुबंध किया जाना अनिवार्य है। हालांकि कुछ विभागों ने यह प्रक्रिया पूरी कर ली है, लेकिन कई विभागों में अब तक अनुबंध की कार्रवाई शुरू नहीं हुई है, जिसे शासन ने गंभीर लापरवाही माना है।
समय पर कार्रवाई नहीं हुई तो विभाग होंगे जिम्मेदार
सरकार ने चेतावनी दी है कि यदि न्यायालय के आदेशों का समयबद्ध अनुपालन नहीं किया गया और भविष्य में अदालत की ओर से कोई प्रतिकूल आदेश पारित होता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी।
एक सप्ताह में भेजनी होगी रिपोर्ट
शासन ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे एक सप्ताह के भीतर अनुबंध से जुड़े सभी मामलों का परीक्षण कर प्रक्रिया पूरी करें और शासन के साथ-साथ उपनल के प्रबंध निदेशक को निर्धारित प्रारूप में रिपोर्ट भेजें।
रिपोर्ट में उपनल के माध्यम से कार्यरत कुल कर्मचारियों की संख्या, अनुबंध कर चुके कर्मचारियों की संख्या, लंबित मामलों का विवरण तथा संबंधित टिप्पणियां अनिवार्य रूप से शामिल करनी होंगी।
सरकार के इस निर्देश से लंबे समय से अनुबंध प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहे उपनल कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही सभी विभागों को निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।