विषय: गणेश जी, विधा- चौपाई
जय हो तेरी गणपति देवा।
भक्त करे सब तेरी सेवा।।
देव सदा तुम संग ही रहना।
यह एहसास हृदय का गहना।।
गणपति तुम सबके हो प्यारे।
शिव- गौरी के आंख के तारे।।
भावमयी जो वंदन करते ।
दुख भक्तों के सब तुम हरते।।
मोदक तुमको अतिशय भाते।
बड़े चाव से उनको खाते।।
रिद्धि सिद्धि के तुम हो दाता।
हम सबके हो भाग्य विधाता।।
जो भी शरण तुम्हारी आया।
कष्ट सभी का तुरंत मिटाया।।
अंतर्यामी हो सब ज्ञाता।
शीश झुकाएं तुम्हें विधाता।।
मूषक सवारी तुमको भाये।
मेरे घर में गणपति आये।।
प्रभु ऐसा देना तुम वरदान।
मिल जाए सबको सम्मान।।
नीलम डिमरी
गोपेश्वर – चमोली, उत्तराखंड