नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश में पॉलीमर यानी प्लास्टिक नोटों को लागू करने की संभावना पर गंभीरता से विचार कर रहा है। बढ़ती नकदी मांग, नोट छपाई की बढ़ती लागत और कटे-फटे नोटों की समस्या को देखते हुए केंद्रीय बैंक पारंपरिक कागजी नोटों के विकल्प तलाश रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आरबीआई की हालिया बोर्ड बैठकों में पॉलीमर करेंसी को लेकर विस्तार से चर्चा हुई है। यदि यह योजना लागू होती है तो भविष्य में भारतीय मुद्रा अधिक टिकाऊ, सुरक्षित और लंबे समय तक चलने वाली हो सकती है।
कागजी नोटों से ज्यादा टिकाऊ होंगे पॉलीमर नोट
पॉलीमर नोट पानी, नमी और धूल से कम प्रभावित होते हैं। ये जल्दी फटते नहीं हैं और सामान्य कागजी नोटों की तुलना में कई गुना अधिक समय तक चल सकते हैं। दुनिया के कई देशों में पहले से ही प्लास्टिक नोटों का उपयोग किया जा रहा है।
नोट छापने का खर्च लगातार बढ़ रहा
आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में नोटों की छपाई पर 6,372 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुआ, जो पिछले वर्ष की तुलना में काफी ज्यादा है। विशेषज्ञों का मानना है कि पॉलीमर नोट शुरुआती दौर में महंगे हो सकते हैं, लेकिन उनकी लंबी उम्र के कारण लंबे समय में लागत कम होगी।
फटे-पुराने नोटों से मिलेगी राहत
देश में हर साल बड़ी संख्या में कटे-फटे और खराब नोटों को चलन से हटाना पड़ता है। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान लगभग 23.8 अरब नोटों को सिस्टम से बाहर किया गया। इनमें सबसे अधिक 500 और 100 रुपये के नोट शामिल रहे। पॉलीमर नोटों के इस्तेमाल से इस समस्या में काफी कमी आ सकती है।
डिजिटल भुगतान बढ़ा, फिर भी नकदी की मांग बरकरार
यूपीआई और डिजिटल पेमेंट के तेजी से बढ़ने के बावजूद देश में नकदी का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। मई 2026 तक देश में प्रचलन में मौजूद कुल मुद्रा 42.86 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। ऐसे में आरबीआई ऐसी मुद्रा व्यवस्था पर विचार कर रहा है जो अधिक टिकाऊ और किफायती साबित हो सके।
हालांकि, आरबीआई की ओर से अभी तक पॉलीमर नोटों को लागू करने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। फिलहाल यह विचार और समीक्षा के स्तर पर है।