गोल्डन कार्ड से इलाज बंद, निजी अस्पतालों की अनदेखी पर कर्मचारियों और पेंशनर्स का फूटा गुस्सा

गोल्डन कार्ड से इलाज बंद, निजी अस्पतालों की अनदेखी पर कर्मचारियों और पेंशनर्स का फूटा गुस्सा

देहरादून। निजी अस्पतालों द्वारा गोल्डन कार्ड से इलाज बंद करने से कर्मचारी और पेंशनर्स नाराज हैं। करोड़ों रुपये के बकाये के चलते अस्पतालों ने यह सेवा बंद कर दी है, जिससे राज्य निगम, निकाय और उपक्रमों के कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कार्मिकों को इलाज में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

शनिवार को इस मुद्दे पर दो प्रमुख संगठनों ने मुख्य सचिव आनंदबर्द्धन और अपर सचिव पेयजल अपूर्वा पांडे से मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखीं। राज्य निगम कर्मचारी अधिकारी महासंघ ने ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि गोल्डन कार्ड की अंशदान कटौती तो नियमित की जा रही है, लेकिन इलाज की सुविधा बेहद सीमित हो गई है।

महासंघ ने बताया कि राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण पर निजी अस्पतालों का करोड़ों का बकाया है, जिससे अस्पतालों ने गोल्डन कार्ड पर इलाज देना बंद कर दिया है। इससे कर्मचारियों में गहरी नाराजगी है।

मुख्य सचिव ने आश्वासन दिया कि इस विषय पर जल्द ही वार्ता कर समाधान निकाला जाएगा

साथ ही जल संस्थान कार्मिकों की लंबित मांगों जैसे शहर वेतनमान, ढांचे की स्वीकृति और ग्रेड-पे वृद्धि पर भी बातचीत हुई। बैठक में महासंघ के पदाधिकारी दिनेश गोसाईं, दिनेश पंत, श्याम सिंह नेगी, शिवप्रसाद शर्मा समेत अन्य मौजूद रहे।

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