देहरादून। विदेश में नौकरी दिलाने का सपना दिखाकर युवाओं से लाखों रुपये की ठगी करने वाले एजेंटों और प्लेसमेंट कंपनियों पर अब विदेश मंत्रालय ने शिकंजा कस दिया है। मंत्रालय ने उत्तराखंड में सक्रिय 14 संदिग्ध एजेंटों और कंपनियों को चिन्हित किया है, जिन पर विदेश भेजने के नाम पर धोखाधड़ी के आरोप लगे हैं।
जानकारी के अनुसार कई युवा इन एजेंसियों के झांसे में आकर विदेश पहुंचे, लेकिन वहां उन्हें नौकरी मिलने के बजाय परेशानियों का सामना करना पड़ा। कुछ मामलों में युवाओं को बिना काम और सुविधाओं के दर-दर भटकना पड़ा।
विदेश मंत्रालय ने इन एजेंसियों और एजेंटों की सूची अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी की है। जांच में सामने आया कि कुछ कंपनियां बंद हो चुकी हैं, जबकि कई अब भी खुलेआम विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों को गुमराह कर रही हैं। कई एजेंसियों के दिए गए पते फर्जी पाए गए। एक कंपनी के पते पर सिर्फ रिहायशी कॉलोनी मिली, जिससे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पेशल टास्क फोर्स ने भी जांच शुरू कर दी है। एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि विदेश मंत्रालय में दर्ज शिकायतों का पूरा ब्योरा मांगा गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद संबंधित एजेंसियों और संचालकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय पुलिस ने भी इन दफ्तरों की जांच शुरू कर दी है।
विदेश मंत्रालय की सूची में शामिल एजेंसियों और एजेंटों में इनफीवे इमीग्रेशन आईलेट्स काशीपुर, अब्रॉड जॉब वाला रुद्रपुर, गैलेक्सी ओवरसीज रुद्रपुर, फास्ट ट्रैक ओवरसीज इंडिया देहरादून, केजी एंटरप्राइज रुड़की, विमरो इंटरनेशनल ऋषिकेश और जीबीसी सॉल्यूशंस देहरादून समेत कई नाम शामिल हैं।
प्रशासन ने युवाओं से अपील की है कि विदेश में नौकरी के नाम पर किसी भी एजेंसी को पैसे देने से पहले उसकी वैधता और सरकारी पंजीकरण की जांच जरूर करें। बिना सत्यापन के किसी एजेंट के झांसे में आना आर्थिक नुकसान और कानूनी परेशानियों का कारण बन सकता है।