विश्व पर्यावरण दिवस पर ‘पिरूल वुमेन’ मंजू शाह को मिलेगा गौरा देवी सम्मान

विश्व पर्यावरण दिवस पर ‘पिरूल वुमेन’ मंजू शाह को मिलेगा गौरा देवी सम्मान

अल्मोड़ा। पहाड़ों के जंगलों में आग की बड़ी वजह माने जाने वाले पिरूल (चीड़ की सूखी पत्तियों) को स्वरोजगार और पर्यावरण संरक्षण का माध्यम बनाने वाली अल्मोड़ा की मंजू आर शाह को इस वर्ष प्रतिष्ठित गौरा देवी सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 5 और 6 जून को ऊर्गम घाटी में आयोजित गौरा देवी पर्यावरण, प्रकृति एवं पर्यटन विकास मेले में प्रदान किया जाएगा।

अल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट क्षेत्र के हाट गांव की रहने वाली मंजू शाह ने अपनी रचनात्मक सोच और हस्तशिल्प कला के जरिए पिरूल को नई पहचान दिलाई है। कभी जंगलों में बेकार समझी जाने वाली इस वन संपदा को उन्होंने महिला सशक्तिकरण, स्वरोजगार और पर्यावरण संरक्षण से जोड़कर एक सफल मॉडल के रूप में विकसित किया। इसी वजह से आज उन्हें देशभर में “पिरूल वुमेन” के नाम से जाना जाता है।

राजकीय इंटर कॉलेज ताड़ीखेत में प्रयोगशाला सहायक के पद पर कार्यरत मंजू शाह पिछले 16 वर्षों से पिरूल आधारित उत्पाद तैयार कर रही हैं। उनके प्रयासों से अब तक 10 हजार से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षण मिल चुका है, जिससे अनेक महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनी हैं।

पिरूल से तैयार किए दर्जनों उत्पाद

मंजू शाह पिरूल से टोकरी, पूजा थाल, फूलदान, आसन, पेन स्टैंड, डोरमैट, टी-कोस्टर, डाइनिंग मैट, मोबाइल चार्जिंग पॉकेट, पर्स, हैट, पेंडेंट, अंगूठी और अन्य सजावटी वस्तुएं तैयार करती हैं। उनके उत्पादों की मांग अब देश के साथ-साथ विदेशों तक पहुंच चुकी है।

पिरूल राखियों से मिली नई पहचान

उन्होंने पिरूल से पर्यावरण-अनुकूल राखियां बनाकर एक नया प्रयोग किया, जिसे लोगों ने काफी पसंद किया। पिछले पांच वर्षों से वह विभिन्न जिलों की महिलाओं को पिरूल राखियां बनाने का प्रशिक्षण भी दे रही हैं, जिससे महिलाओं को अतिरिक्त आय का स्रोत मिला है।

वनाग्नि रोकने में भी मिल रही मदद

उत्तराखंड के जंगलों में हर वर्ष बड़ी मात्रा में गिरने वाला पिरूल गर्मियों में वनाग्नि का प्रमुख कारण बनता है। मंजू शाह की पहल के चलते पिरूल के संग्रह और उपयोग को बढ़ावा मिला है, जिससे जंगलों में आग की घटनाओं को कम करने में भी मदद मिल रही है। साथ ही ग्रामीणों के लिए आय के नए अवसर भी विकसित हुए हैं।

कई पुरस्कारों से हो चुकी हैं सम्मानित

मंजू शाह को वर्ष 2019 में India International Science Festival 2019 में बेस्ट अपकमिंग आर्टिस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया था। उनके नवाचार और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में किए गए कार्यों की सराहना विभिन्न मंचों पर हो चुकी है।

विश्व पर्यावरण दिवस पर मिलने वाला गौरा देवी सम्मान उनके वर्षों के समर्पण, नवाचार और पर्यावरण संरक्षण में योगदान का सम्मान माना जा रहा है। यह सम्मान उन हजारों महिलाओं के प्रयासों को भी नई पहचान देगा, जो पिरूल को रोजगार का साधन बनाकर आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रही हैं।