देहरादून। दालचीनी (सिनेमन) के उत्पादन में श्रीलंका और इंडोनेशिया की तरह उत्तराखंड भी अब व्यावसायिक खेती की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। स्वास्थ्य लाभ और प्राकृतिक स्वाद के कारण वैश्विक बाजार में दालचीनी की बढ़ती मांग को देखते हुए राज्य सरकार और विशेषज्ञ उत्पादन बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
सेलाकुई स्थित परफ्यूमरी एवं सगंध अनुसंधान विकास संस्थान (पूर्व नाम सगंध पौधा केंद्र) ने पहली बार दालचीनी उत्पादन को लेकर अंतरराष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया। इसमें श्रीलंका और इंडोनेशिया के विशेषज्ञों ने दालचीनी की खेती, कटाई, प्रसंस्करण और विपणन के सफल मॉडल साझा किए।
उत्तराखंड में अभी तक तेजपात के पौधों से मुख्य रूप से पत्तियों का उपयोग किया जाता है, जबकि छाल से दालचीनी का उत्पादन बेहद सीमित है। विशेषज्ञों के अनुसार व्यावसायिक खेती अपनाकर राज्य इस क्षेत्र में नई पहचान बना सकता है।
महक क्रांति नीति के तहत चंपावत और नैनीताल जिलों में 5,200 हेक्टेयर क्षेत्र में ‘सिनेमन वैली’ विकसित की जा रही है। इस परियोजना से किसानों की आय बढ़ाने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
संस्थान के निदेशक नृपेंद्र चौहान ने बताया कि उत्तराखंड की जलवायु दालचीनी उत्पादन के लिए अनुकूल है। इसकी एक खासियत यह भी है कि जंगली जानवर इस फसल को नुकसान नहीं पहुंचाते। संस्थान ने तेजपात की नई किस्म भी विकसित की है, जिससे भविष्य में दालचीनी उत्पादन को और गति मिलने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैज्ञानिक तरीके से खेती और प्रसंस्करण को बढ़ावा दिया जाए तो उत्तराखंड दालचीनी के वैश्विक कारोबार में अपनी अलग पहचान बना सकता है।