दून अस्पताल में जनऔषधि केंद्र की फार्मासिस्ट को डॉक्टर की कथित धमकी, दवा न देने के निर्देश पर विवाद

दून अस्पताल में जनऔषधि केंद्र की फार्मासिस्ट को डॉक्टर की कथित धमकी, दवा न देने के निर्देश पर विवाद

देहरादून: दून अस्पताल में जनऔषधि केंद्र पर तैनात महिला फार्मासिस्ट को ऑर्थो विभाग के एक डॉक्टर द्वारा कथित तौर पर मरीजों को कुछ दवाएं न देने की हिदायत देने का मामला सामने आया है। आरोप है कि डॉक्टर ने फार्मासिस्ट से मरीजों को कैल्शियम और पोषण से संबंधित दवाएं जनऔषधि केंद्र से नहीं देने को कहा। फार्मासिस्ट ने जब इसका कारण पूछा तो डॉक्टर कथित तौर पर कोई स्पष्ट जवाब दिए बिना वहां से चले गए।

तीन दिन पहले भी पहुंचा था डॉक्टर

जानकारी के मुताबिक, संबंधित डॉक्टर करीब तीन दिन पहले भी जनऔषधि केंद्र पहुंचे थे। उस दौरान भी उन्होंने मरीजों को केंद्र से दवा नहीं देने की बात कही थी। फार्मासिस्ट ने डॉक्टर के निर्देश को मानने से इनकार कर दिया।

फार्मासिस्ट के अनुसार, प्राचार्य डॉ. गीता जैन की ओर से स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि यदि कोई डॉक्टर मरीजों को जनऔषधि केंद्र की दवा लेने से रोकता है तो इसकी तत्काल शिकायत की जाए।

इसके बाद शुक्रवार को कुछ डॉक्टरों की ओर से एक पीजी डॉक्टर को जनऔषधि केंद्र भेजे जाने की बात भी सामने आई। आरोप है कि पीजी डॉक्टर ने भी मरीजों को वहां से दवा न देने के लिए कहा। इससे जनऔषधि केंद्र की सस्ती दवाओं और डॉक्टरों द्वारा लिखी जाने वाली दवाओं को लेकर विवाद खड़ा हो गया।

46 रुपये की दवा बाहर 200 से 250 रुपये तक

मामले में जनऔषधि केंद्र पर उपलब्ध दवाओं की कीमत को लेकर भी चर्चा है। जानकारी के अनुसार, एक सामान्य सॉल्ट की दवा जनऔषधि केंद्र पर करीब 46 रुपये में उपलब्ध है, जबकि बाहर मेडिकल स्टोर पर इसकी कीमत करीब 200 से 250 रुपये तक बताई जा रही है।

ऐसे में मरीजों को कम कीमत पर दवा उपलब्ध कराने वाले जनऔषधि केंद्र से दवा लेने से रोकने के आरोप को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

अस्पताल प्रशासन ने शुरू की जांच

दून अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रविंद्र सिंह बिष्ट ने मामला संज्ञान में आने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि यदि कोई डॉक्टर इस तरह से मरीजों को जनऔषधि केंद्र की दवा लेने से रोक रहा है तो यह गलत है। मामले की जांच कराई जा रही है। साथ ही डॉक्टरों को बाहर की दवाएं नहीं लिखने के निर्देश दिए गए हैं।